Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
हिन्दी ग़ज़ल के क्षितिज पर चमकता सितारा : के० पी० अनमोल- डॉ० भावना

के० पी० अनमोल की ग़ज़लें रवायती शायरी से अलग बड़ी शिद्दत से अपनी ज़मीन तलाशती नज़र आती हैं। शेरों के कहने का अंदाज़, बिम्बों का अलहदा प्रयोग और समसामयिक घटनाओं पर पैनी नज़र इन्हें इनके ही अन्य समकालीन शायरों से अलग करती है।

भारतीय वैचारिकी और चिन्तन- श्रीहरी वाणी

बलात किसी पर अपनी बात थोपने या सहमति हेतु बाध्य करना हमारी सनातन परम्परा में स्वीकार्य नहीं रहा। यहाँ आचार्य शंकर पूरे देश में विद्वानों को अपनी तार्किकता से अपना अनुयायी बनाने के साथ अन्य को निष्प्रयोज्य कह सकते थे लेकिन आज तक चार्वाक दर्शन की पुस्तकें भी हमारे यहाँ पठन-पाठन, विचार हेतु सुरक्षित हैं, विपरीत भाषा-बोली और स्पष्ट कथन के कारण चर्चित कबीर भी विद्वानों से परिपूर्ण काशी नगरी में सम्मानपूर्वक सुरक्षित रहे। वर्तमान काल में भी देखें तो पूरे संसार में विवादित होकर भी ओशो रजनीश और उनके विचार इस देश में दबाए-कुचले नहीं गये। इतना सब होने के बाद भी क्यों ऐसी परिस्थितियाँ बार-बार निर्मित होते रहती हैं कि हमें हमेशा ही पुनर्विचार की ज़रूरत पड़ती रहती है?

रहीम का नीतिकाव्य- कृष्ण बिहारी पाठक

हिंदी साहित्य के नीति काव्यकारों में अब्दुर्रहीम खानखाना एक महत्वपूर्ण नाम है। रहीम ने अपने जीवन में बचपन से ही राजसी वैभव, राजनीतिक षड़यंत्र, युद्ध की त्रासदी, अमीरी-ग़रीबी आदि के अनुभवों को आत्मसात किया था। रहीम ने सच्चे अर्थों में दुनिया और दुनियादारी देखी थी। जगत व्यवहार का ख़ासा अनुभव उनके पास था।

दिवाकर पाण्डेय 'चित्रगुप्त' का लेख 'जबरा पहाड़िया'

बड़ा-सा तिलक लगाने के कारण लोग इसे तिलका के नाम से जानने लगे, जिसका दूसरा मतलब गुस्सैल या लाल आँखों वाला भी होता है। धीरे-धीरे पूरा संथाल इसे अपना सरदार भी मानने लगा, जिस कारण इनके नाम के साथ माझी भी जुड़ गया। इस प्रकार से इतिहास में एक नए किरदार का जन्म हुआ तिलका माझी।