Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
लक्ष्मण बूटी संजीवनी बूटी- डॉ० आरती 'लोकेश'

रामाचरितमानस के छठे कांड 'लंका काण्ड' में रावण के पराक्रमी शूरवीर पुत्र मेघनाद से लड़ते हुए प्रभु राम के छोटे भाई लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं तो संकटमोचन पवनपुत्र हनुमान को पहले भेजा जाता है लंका के सुविख्यात वैद्य सुषेण को लाने और वैद्य के बताने पर संजीवनी बूटी लेने भेजा जाता है। जिस पर्वत पर बूटी मिलती है, उसे उखाड़कर अंजनिसुत लंका ले आते हैं और सुषेण वैद्य लक्ष्मण जी की चिकित्सा कर उन्हें होश में लाते हैं। संजीवनी बूटी देनेवाला यह पर्वत अब श्रीलंका की ही नैसर्गिक सम्पदा में सम्मिलित है। श्रीलंका की जलवायु में उगने वाले पेड़-पौधों से प्रतिकूल इस पर उगी भिन्न वनस्पति इस बात का प्रमाण है कि यह मूल रूप से लंका का न होकर बाहर से आगत सम्पत्ति है। संजीवनी बूटी के गुण किसी अन्य बूटी से अलग हैं। यह एक आयुर्वेदिक शक्तिदायक औषधि है, जो मृत कोशिकाओं में पुनर्जीवन का संचार करती है। इसकी मुख्य विशेषता है कि पानी की कमी से सूखकर पपड़ी जैसे बन जानेवाले ये पौधे पानी के संसर्ग से एक अर्से बाद भी पुन: तरोताज़ा हो जाते हैं। अपनी ही मृत कोशिकाओं में जीवन फूँक देते हैं, कुकनूस पक्षी की तरह। जिस ज्ञान-विज्ञान से हमारे पूर्वज शताब्दियों पहले समृद्ध थे, उसे इतने वर्षों बाद हम कितना जान पाए हैं, यह समझने की आवश्यकता है। संजीवनी बूटी के इतिहास तथा उस पर हुए अनुसंधानिक तथ्यों का समावेश इस पत्र में किया गया है तथा ऐसी चमत्कारिक औषधियों के ज्ञान को लुप्त न होने देने पर बल दिया गया है।

युग संदर्भ के चेतनागत धरातल पर तबस्सुम जहां का साहित्य सृजन- डॉ० अल्पना सुहासिनी

तबस्सुम जहां ने समाज के तक़रीबन हरेक विषय पर अपनी लेखनी चलाई है। स्त्री जीवन की विसंगतियों पर केंद्रित लघुकथा 'मुक्ति', दांपत्य जीवन पर कटाक्ष करती लघुकथा 'लक़ीर बनाम लकीर' विशेष उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा नौकरी के लिए मौजूदा साक्षत्कार प्रक्रिया की खामियों को उजागर करती इनकी छोटी कहानी 'भूसे की सुई' विदेशी पत्रिका का हिस्सा बन चुकी है।

निराला की हिंदी ग़ज़लों का तेवर और स्वर- ज़ियाउर रहमान जाफ़री

निराला ने ग़ज़लें प्रयोग के तौर पर लिखी थीं। उन्होंने ग़ज़लें लिखकर एक प्रकार से ग़ज़ल को हिंदी कविता में लाने का प्रयास किया। निराला के पूर्व के ग़ज़लकारों और निराला की ग़ज़लों में एक अंतर साफ़ है कि पंडित निराला की ग़ज़लों में हिंदी का जातीय संस्कार झलकता है।

मैं अखिल विश्व का गुरू महान : अटल बिहारी वाजपेयी- डॉ० अमित कुमार मिश्रा

किसी भी चीज़ को देखने का अटल जी का अपना एक अलग ही नज़रिया था। भारत को वे मात्र एक ज़मीन का टुकड़ा नहीं मानते थे। उनका मानना था कि भारत मानवीयता का एक उच्च आदर्श है। यहाँ अनेक संस्कृतियों, भाषा, जाति, धर्म, रंग-रूप आदि के माध्यम से अखंडता में एकता का एक ऐसा संदेश प्रतिध्वनित होता है, जिससे विश्व अभिभूत है। भारत के इन्हीं सब गुणों के कारण उसे विश्वगुरु की उपाधि दी गई है।