Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
व्यंग्य क्षणिकाओं के मास्टर-ब्लास्टर : डॉ. परमेश्वर गोयल उर्फ़ काका बिहारी

बहुमुखी प्रतिमा के धनी डॉ० परमेश्वर गोपल उर्फ़ काका बिहारी मूलतः हास्य-व्यंग्य के कवि हैं। व्यंग्य-क्षणिकाओं के माध्यम से साहित्य जगत में आपने अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है। आपके द्वारा क्षणिकाओं पर चक्रधर शुक्ल द्वारा विस्तार से की गई चर्चा पढ़िए।  

कभी अपने भी दाँत गिनकर देखे इंसान- राकेश अचल

मैं जिन दाँतों की बात कर रहा हूँ वे बहुउदेशीय होते है। दुनिया बनाने वाले ने दाँत बनाते समय ही उनका काम भी तय कर दिया था शायद इसीलिए आप ये जानकर हैरान होंगे कि दाँत का काम सिर्फ किसी चीज को पकड़ना, काटना, फाड़ना और चबाना ही नहीं है। जानवर इन दाँतों से कुतरने खोदने, सँवारने और लड़ने का काम लेते हैं। दाँत, आहार को काट-पीसकर गले से उतरने योग्य बनाते हैं। खुद ईश्वर ने एक अवतार में अपने दाँतों से सकल ब्रम्हांड को ऊपर उठा लिया था।

जॉन एलिया: अदब के आईने में अधीर मन का शायर- अखिलेश कुमार मौर्य

अक्सर प्रेमी जब प्रेम में होता है तो वह अपने को अमर मान लेता है। जॉन एलिया प्रेम करते हुए सच को स्वीकार करते हैं और उन्हें पता है एक दिन सबको मरना ही है। ऐसी ही शायरी जॉन एलिया को परंपरा से अलग बनाती है। एक शेर देखिए–

कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
क्या  सितम   है  कि  हम  लोग   मर  जाएँगे

'सिलसिला मुनादी का' में सामाजिक सरोकार व समन्वय की भावना- के० पी० अनमोल

सिलसिला मुनादी का आशा सिंह का पहला ग़ज़ल संग्रह है, जिसमें इनकी कुल 90 ग़ज़लें संकलित हैं। इन ग़ज़लों से गुज़रते समय इस तरह के अनेक शेर आपके सामने से गुज़रेंगे। इनकी ग़ज़लें पढ़ते हुए आपको लगेगा कि ये कोई गीतकार है, जो ग़ज़ल लिख रहा है या कोई कथाकार। आशा जी कई अन्य विधाओं में भी लिखती हैं लेकिन ग़ज़ल उनकी मुख्य विधा ही है। कुल मिलाकर यह कि आज के हिंदी ग़ज़लकारों में इनकी अपनी एक अलग शैली दिखाई पड़ती है। और ऐसा केवल एक संग्रह और 90 ग़ज़लों में होना, एक बड़ी ताक़त कहा जा सकता है।