Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
यादों में रोशन चराग़- रेहान सिद्दीकी

गोविंद गुलशन सिर्फ़ एक शायर नहीं थे, वो मुहब्बत का चलता-फिरता पैग़ाम थे। ऐसी रोशनी, जो नफ़रत के अँधेरों में भी इंसानियत जगाती रही और जो अपनी शायरी के ज़रिए हमेशा ज़िंदा रहेगी।

एक संवेदनशील मार्गदर्शक और एक समर्पित साधक को खो दिया है- डॉ० माला कपूर 'गौहर'

गोविन्द ‘गुलशन’ जी का जाना केवल एक शायर का बिछड़ना नहीं, बल्कि साहित्य का एक सशक्त स्वर, एक संवेदनशील मार्गदर्शक और मेरे जीवन का उस्ताद खो देना है। उनकी रोशनी, उनके शब्द और उनका आशीर्वाद सदा मेरा पथ आलोकित करते रहेंगे।

वो जो शायरी को इबादत समझते थे- तरुणा मिश्रा

वो शख़्स जिसने शायरी को फ़न नहीं, इबादत की तरह जिया, जिसकी हर दाद से हौसले को परवाज़ मिलती थी, जो उस्ताद कम, रहबर और साया ज़्यादा थे, जिनकी महफ़िलों में लफ़्ज़ भी महकते थे और दिल भी, गोविंद गुलशन सिर्फ़ नाम नहीं, हमारी अदबी रूह का हिस्सा हैं।

आत्मीयता के समंदर गोविंद गुलशन जी- कृष्ण कुमार नाज़

धुएँ  में  हैं  उजाले  की   लकीरें
दिया शायद अचानक बुझ गया है
मगर उसकी रोशनी अब भी हमारी यादों में जल रही है।