Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
स्त्री इतिहास की पहली पुस्तक की रचयिता : सावित्री सिन्हा- डॉ० शुभा श्रीवास्तव

सावित्री सिन्हा का ग्रंथ ‘मध्यकालीन हिंदी कवयित्रियाँ’ अपने आप में अनूठा ग्रंथ है। इसका प्रथम संस्करण, जो मुझे प्राप्त है, उसका प्रकाशन वर्ष 1953 ई० है। इसमें उल्लेखित कवयित्रियों के परिचय, तिथि को अन्य ग्रंथों से लिया गया है पर उन पर समालोचनात्मक दृष्टि सावित्री जी की निजी है। मध्यकालीन हिंदी कावयित्रियों पर पर्याप्त सामग्री व अनुशीलन सावित्री जी द्वारा किया गया है। मध्यकालीन हिंदी का पूरा इतिहास स्त्री काव्य की दृष्टि से यह पुस्तक प्रस्तुत करती है। सुमन राजे का इतिहास ग्रंथ भी इसी को आधार बनाकर रचा गया है।

भारतीय जीवन दर्शन और पर्यावरण संरक्षण- डॉ० नवलता

ध्यातव्य है कि वृक्ष न केवल पुष्प फल तथा काष्ठादि प्रदान करते हैं अपितु
वर्षाचक्र, ऋतुचक्र तथा वायुमण्डलीय ताप के सन्तुलन  में इनकी विशिष्ट भूमिका है।

लक्ष्मण बूटी संजीवनी बूटी- डॉ० आरती 'लोकेश'

रामाचरितमानस के छठे कांड 'लंका काण्ड' में रावण के पराक्रमी शूरवीर पुत्र मेघनाद से लड़ते हुए प्रभु राम के छोटे भाई लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं तो संकटमोचन पवनपुत्र हनुमान को पहले भेजा जाता है लंका के सुविख्यात वैद्य सुषेण को लाने और वैद्य के बताने पर संजीवनी बूटी लेने भेजा जाता है। जिस पर्वत पर बूटी मिलती है, उसे उखाड़कर अंजनिसुत लंका ले आते हैं और सुषेण वैद्य लक्ष्मण जी की चिकित्सा कर उन्हें होश में लाते हैं। संजीवनी बूटी देनेवाला यह पर्वत अब श्रीलंका की ही नैसर्गिक सम्पदा में सम्मिलित है। श्रीलंका की जलवायु में उगने वाले पेड़-पौधों से प्रतिकूल इस पर उगी भिन्न वनस्पति इस बात का प्रमाण है कि यह मूल रूप से लंका का न होकर बाहर से आगत सम्पत्ति है। संजीवनी बूटी के गुण किसी अन्य बूटी से अलग हैं। यह एक आयुर्वेदिक शक्तिदायक औषधि है, जो मृत कोशिकाओं में पुनर्जीवन का संचार करती है। इसकी मुख्य विशेषता है कि पानी की कमी से सूखकर पपड़ी जैसे बन जानेवाले ये पौधे पानी के संसर्ग से एक अर्से बाद भी पुन: तरोताज़ा हो जाते हैं। अपनी ही मृत कोशिकाओं में जीवन फूँक देते हैं, कुकनूस पक्षी की तरह। जिस ज्ञान-विज्ञान से हमारे पूर्वज शताब्दियों पहले समृद्ध थे, उसे इतने वर्षों बाद हम कितना जान पाए हैं, यह समझने की आवश्यकता है। संजीवनी बूटी के इतिहास तथा उस पर हुए अनुसंधानिक तथ्यों का समावेश इस पत्र में किया गया है तथा ऐसी चमत्कारिक औषधियों के ज्ञान को लुप्त न होने देने पर बल दिया गया है।

युग संदर्भ के चेतनागत धरातल पर तबस्सुम जहां का साहित्य सृजन- डॉ० अल्पना सुहासिनी

तबस्सुम जहां ने समाज के तक़रीबन हरेक विषय पर अपनी लेखनी चलाई है। स्त्री जीवन की विसंगतियों पर केंद्रित लघुकथा 'मुक्ति', दांपत्य जीवन पर कटाक्ष करती लघुकथा 'लक़ीर बनाम लकीर' विशेष उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा नौकरी के लिए मौजूदा साक्षत्कार प्रक्रिया की खामियों को उजागर करती इनकी छोटी कहानी 'भूसे की सुई' विदेशी पत्रिका का हिस्सा बन चुकी है।