Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की सातवीं कड़ी

प्रखर को रोता हुआ पाकर शिखा भी फूट-फूट कर रोने लगी। प्रखर को चोट पहुँचे और शिखा चोटिल न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता था। प्रखर को रोता हुआ देखकर समीर की भी आँखों में भी नमी तैर गई। दर्द जाने-अनजाने में एक-दूसरे की दुखती रगों को छू रहे थे।

नीलम तोलानी 'नीर' के लघु-उपन्यास 'करवाचौथ' की अंतिम कड़ी

मैंने तुम्हारा सपना... खैर, कबीर तुमने प्रॉमिस किया था न ..कि कभी भी परिस्थितियों से भागोगे नहीं, हर हाल में ...तुम्हें याद है ना !! मैंने हर करवाचौथ तुम्हारी लंबी उम्र की प्रार्थना की है ...कबीर ...पता नहीं ऊपर वाले ने कभी भी मेरी कोई प्रेयर क्यों नहीं मानी। पर तुमने मानी है मेरी हर बात... मेरा हर नखरा उठाया है तुमने... मेरे लिए तो तुम्हीं...मेरी प्रार्थना की लाज रखना प्लीज....

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की छठवीं कड़ी

उसके मैसेज पढ़कर शिखा ने लिखा- मैं भी तुम्हें कभी भूली नहीं प्रखर! मेरा पहला प्यार थे तुम। तुमने मुझे अहसास करवाया प्यार क्या होता है। हमारे प्यार में शरीर कभी आया ही नहीं। तभी रूह से रूह का रिश्ता ख़त्म हुआ ही नहीं। तुम्हारी कई कविताएँ आज भी मेरे पास महफ़ूज़ हैं। जब भी तुम्हारी बहुत याद आती थी, तुम्हारी कविताओं को निकाल कर पढ़ लेती थी और घंटों तुम्हारे ख़यालों में खोई रहती।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की पाँचवी कड़ी

एक उम्र के बाद कुछ दर्द बहुत अपने-से लगने लगते हैं। शिखा कुछ ऐसा ही प्रखर के दर्द में महसूस करने लगी थी। यही सच प्रखर से भी जुड़ गया था।
स्वतः घटित होने वाले भाव कितने निश्चल और मासूम होते हैं। यह प्रेम करने वाले ही समझ सकते हैं।