Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
अमरीक सिंह दीप की कहानी 'हरम'

"ये फटेहाल बदहवास मुफ़लिस लोग और हरम? अच्छा मज़ाक कर लेते हो तुम।"
"मज़ाक नहीं हुज़ूर, ये हक़ीक़त बयानी कर रहा हूँ मैं। इस वक़्त इस मुल्क पर अंग्रेजों की नहीं, इसी मुल्क में रहने वाले दौलतमंदों और सौदागरों की हुकूमत है। इन सरमायेदारों और सौदागरों का एक ही मज़हब हैं– दौलत। दौलत के लिए ये अपना दीन-ईमान ही नहीं, अपनी बीवी, बेटी, बहन यहाँ तक कि अपनी माँ को बेचने तक में गुरेज़ नहीं करते।"