Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
अशोक आनन की क्षणिकाएँ

जब तक-
बिकता रहेगा 
आदमी,
रौनक बनी रहेगी-
बाज़ार में!

आशा खत्री 'लता' की क्षणिकाएँ

गली-गली
मोहल्ले-मोहल्ले
अंतरराष्ट्रीय सम्मान
बँटते हैं,
स्वयंभू साहित्यकार
हर जगह
आ डटते हैं!

 

रमेश कुमार भद्रावले की क्षणिकाएँ

हमने
मिट्टी के चूल्हे की
ताक़त भी
देखी है,
परिवार के पचास
लोगों की रोटियाँ
सुबह-शाम सेंकी है!

 

डॉ० शील कौशिक की क्षणिकाएँ

अचानक पेड़ की डाल पर
आ बैठी एक चिड़िया के 
उड़ जाने पर
देर तक झूलती रही
मैं भी डाल-सी, 
उस दिन 
जब छुआ था तुमने
अचानक मुझे!