Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
रमेश कुमार भद्रावले की क्षणिकाएँ

हमने
मिट्टी के चूल्हे की
ताक़त भी
देखी है,
परिवार के पचास
लोगों की रोटियाँ
सुबह-शाम सेंकी है!

 

डॉ० शील कौशिक की क्षणिकाएँ

अचानक पेड़ की डाल पर
आ बैठी एक चिड़िया के 
उड़ जाने पर
देर तक झूलती रही
मैं भी डाल-सी, 
उस दिन 
जब छुआ था तुमने
अचानक मुझे!

डॉ० मीनू खरे की क्षणिकाएँ

घरेलू महिला
कुछ उल्टे, कुछ सीधे फंदों के बीच
फँसी एक सलाई
जिसके बिना स्वेटर की उत्पत्ति संभव नहीं
पर फिर भी जिसका अधिकार नहीं
स्वेटर के रंग, आकार और डिज़ाइन पर

ज्योत्स्ना शर्मा 'प्रदीप' की क्षणिकाएँ

हाँ! मुझे रश्क
होता है,
जब तुम्हारी आँखों में
किसी के
नाम का एक
अनबहा
अश्क होता है।