Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' की क्षणिकाएँ

बहुत देर से
ठहरा हुआ हूँ
इनबाॅक्स में,
शायद तुम लिखोगी कुछ 
या फिर भेजोगी कोई इमोजी,
मौन टूटता ही नहीं,
तुम भी सोच रही होगी 
मुझे ही,
जानता हूँ।

डॉ. मिथिलेश दीक्षित की क्षणिकाएँ

चेहरे बिकाऊ थे कभी
अब तो मुखौटे बिक रहे हैं,
साफ़-सुथरे दिख रहे हैं।

वीणा शर्मा वशिष्ठ की क्षणिकाएँ

हर मन की क्यारी में
बैर पनप रहा
क्यों न...
प्रेम की खाद डाल
माटी थपथपा दें...
नेह के
पुष्प खिला दें।

संध्या यादव की क्षणिकाएँ

दुल्हन बनने की चाह में
एक दुल्हन ने उम्र गुज़ार दी
रंग-बिरंगे कपड़ों में विधवा रह कर