Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
पुष्पा सिंघी के हाइकु

महका प्यार 
सरहद के पार
ढही दीवार।

डॉ० शैलेष गुप्त 'वीर' के हाइकु

मन-पतंग
गुलाबी कल्पनाएँ
लाया वसन्त।

कश्मीरी लाल चावला के हाइकु

खामोश लब
कुछ नहीं बोलते
आँखें कहती

प्रदीप कुमार दाश 'दीपक' के हाइकु

 
बीनो न व्यर्थ 
कंकड़ व पत्थर 
हीरा भीतर।