Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० रवीन्द्र प्रभात के हाइकु

उनका लोहा
मेरी केवल धार
मैं फटेहाल।

डॉ० शैलेष गुप्त 'वीर' के हाइकु

नदी झूमती
पार कर त्रासदी 
नभ चूमती।

डॉ० मिथिलेश दीक्षित के हाइकु

रंग भरे हैं
ज़िन्दगी की आस ने
हर पात में।