Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सावन, वर्षा एवं प्रेम- अलका मिश्रा

प्रेम और सावन का संगम प्रेम एवं पुरानी यादों की गहरी भावना को भी जगाता है, क्योंकि भारत में मानसून का मौसम अक्सर प्यार से जोड़कर देखा जाता है। बारिश का मौसम एक ताज़ा, जीवंत वातावरण लेकर आता है, जो नई शुरुआत और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। इसीलिए  हिन्दी साहित्य में भी सावन का अलग ही महत्व होता है।

यदि हम अब भी न चेते- मीनाधर पाठक

एक समय था कि घर में एक कूलर होता था और घर के सभी सदस्य उसी एक कमरे में खाते-पीते, सोते-बैठते थे। अब सभी के घर लगभग हर कमरे में एयर कंडीशनर लगा है। सभी घरेलू कार्य मशीनी हो गए हैं इसलिए पानी का खर्च भी अनियंत्रित हो गया है। कई बार तो घरों की छत पर रखी टंकियों से भूल वश या लापरवाही से देर तक मीठा पानी व्यर्थ ही बहता हुआ सीधे गंदी नाली में चला जाता है। हम अपनी इन आदतों पर लगाम तो लगा ही सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की प्रासंगिकता- अलका मिश्रा

भारत में श्रमिकों की स्थिति पर विचार करना भी अत्यंत आवश्यक है । भारत में, विभिन्न क्षेत्रों और क्षेत्रों में श्रमिकों की स्थिति अलग-अलग है। हालाँकि कुछ उद्योगों ने बेहतर कामकाजी परिस्थितियाँ और वेतन प्रदान करने में प्रगति की है, लेकिन अन्य उद्योगों में चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। 

उत्सवों का देश और चुनावी परिवेश- अलका मिश्रा

ख़बरों को तीख़े तेवर देने के लिए मीडिया इसे चुनावी समर भी कहा जाने लगा है। समर शब्द लगते ही यह बिल्कुल युद्ध जैसा प्रतीत होने लगता है और हर नेता, हर पार्टी निजी स्वार्थों के चलते इतने सुंदर समाज में अपने भड़काऊ वक्तव्यों से प्रेम से सराबोर दिलों में ज़हर घोलने का काम करना शुरू कर देते हैं।