Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
निहाल सिंह की कविताएँ

धीमे-से चीखता हुआ
कहता है खिलौने ले लो, खिलौने ले लो
दस मीटर दूर तक भी
नही पहुँच पा रही उसकी दबी हुई आवाज़

पवन कुमार मारूत की कविताएँ

पुनर्बलन
एक ऐसा साधन है
जो उत्साह उत्पन्न कर देता है काम करने का
बाल-फूलों ने तिल झड़ाये दिनभर
लालच में खिचड़ी के

निधि व्यास की कविताएँ

केवल जो जीता जाए, वो ही प्रेम नहीं
हार कर भी प्रेम सदैव रहता है
एक-दूसरे के हृदयस्थल पर
एक-दूसरे का प्रेम रहता है

भानु झा की ग़ज़लें

देखिए  आज  उसकी वुसअत में
मैं भी किस हद तलक समाता हूँ