Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
निधि व्यास की कविताएँ

केवल जो जीता जाए, वो ही प्रेम नहीं
हार कर भी प्रेम सदैव रहता है
एक-दूसरे के हृदयस्थल पर
एक-दूसरे का प्रेम रहता है

भानु झा की ग़ज़लें

देखिए  आज  उसकी वुसअत में
मैं भी किस हद तलक समाता हूँ

अर्चना अनुप्रिया की कविताएँ

रिश्ते-नाते के अपने नियम
स्वार्थ-परमार्थ की आँख मिचौली
अपने-पराए की विचित्र कहानी
कभी दुश्मनी, कभी हमजोली
हर व्यवहार अपने कर्मों से
स्वयं को सिद्ध करने को बेताब
पल-प्रतिपल लिखती रहती है
ज़िंदगी हर मानव की किताब

अनुज पाण्डेय के गीत

टूटी थी पतवार कि
कैसे इतनी जल्दी छोर पकड़ते?
कैसे सबकुछ छोड़
इश्क़ की इक पतंग की डोर पकड़ते
हम समाज के धुर निर्धन थे
धन में बस दो-चार सपन थे
सपने बेच इश्क़ ले आते
उर इतना भी अभय नहीं था