Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

निहाल सिंह की कविताएँ

निहाल सिंह की कविताएँ

धीमे-से चीखता हुआ
कहता है खिलौने ले लो, खिलौने ले लो
दस मीटर दूर तक भी
नही पहुँच पा रही उसकी दबी हुई आवाज़

शहर बदल गये

पहले से कितने बदल गये हैं ये शहर
ख़ाली-ख़ाली सड़कों पर
चंद रिक्शे चला करते थे सुविधा अनुसार
अब है कि मोटर-कारों से भरी पड़ी हैं
सड़कों की छातियाँ

गलियारों के किनारों पर
कुछ रेड़ियाँ लगती थीं सब्जियों की
अब है कि बड़े-बड़े
पाँच सितारा होटल पसरे पड़े हैं

पहले सड़कों के किनारे
पौधे लगे हुआ करते थे गुलाब के
अब है कि ढेर सारी
पोलोथिन की थैलियाँ बिखरी पड़ी हैं

चार पैसे में
सबकुछ मिलता था
यहाँ अब है कि
जेबें ख़ाली हो जाती हैं
चंद आवश्यकता की वस्तुओं के वास्ते

सचमुच कितने बदल गये हैं
आजकल ये शहर

*********


खिलोने वाला

जेठ की चिलचिलाती धूप में
टूटी-फूटी,
पुराने मॉडल वाली साइकिल लिए
चला आ रहा है गाॅंव की ओर
दुबला-पतला हाड़-मांस का पुतला
जैसे हवा में फटा हुआ
पुराने कपड़े का टुकड़ा उड़ा आ रहा हो

धीमे-से चीखता हुआ
कहता है खिलौने ले लो, खिलौने ले लो
दस मीटर दूर तक भी
नही पहुँच पा रही उसकी दबी हुई आवाज़

मैं कहता हूँ कि
तनिक ज़ोर से बोलो
ताकि तुम्हारी ये फटी हुई सदा
बच्चों के नन्हें कानों तक पहुँचे
और वो निकलकर आएँ
अपने-अपने निलय से

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रचनाकार परिचय

निहाल सिंह

ईमेल : nihal6376r@gmail.com

निवास : झुंझुनूं (राजस्थान)

शिक्षा- बारहवीं तक
व्यवसाय- कृषि
प्रकाशन- कई पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबसाइट्स में रचनाएँ प्रकाशित
निवास- झुंझुनूं (राजस्थान)