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नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

निधि व्यास की कविताएँ

निधि व्यास की कविताएँ

केवल जो जीता जाए, वो ही प्रेम नहीं
हार कर भी प्रेम सदैव रहता है
एक-दूसरे के हृदयस्थल पर
एक-दूसरे का प्रेम रहता है

था मालूम कि

था मालूम कि हाथ भी ना थाम सकेंगे जिसका
उम्रभर वो शख्स मेरी रूह से लिपटा रहा

एक मुद्दत से उसने देखा नहीं सँवरना मेरा
एक मुद्दत को आईना मेरी इक मुस्कान को तरसता रहा

जाने क्यों कहते हैं लोग कि दूरियाँ मुहब्बत को मिटा देती हैं
मैं जितना दूर हुई उससे उतना इश्क़ परवान चढ़ता रहा

सुना था इश्क़-विश्क कोरी किताबों की बातें हैं
यकीनन उस किताब का हर लम्हा मेरे साथ हर्फ़-दर-हर्फ़ घटता रहा

न पास होकर भी वो यूँ साथ था मेरे
कि हर सहर उसकी धड़कनों ने जगाया मुझको
हर शब वो मेरी साँसों में उतरता रहा

था मालूम कि हाथ भी ना थाम सकेंगे जिसका
उम्रभर वो शख्स मेरी रूह से लिपटा रहा

*************


क्या संभव है

तुम्हें इस कदर पा जाऊँ
कि फिर कोई प्यास शेष न रहे
क्या संभव है!

तुम पर इस तरह मिट जाऊँ
कि फिर कहीं मरण शेष न रहे
क्या संभव है!

जीवन की धारा के किनारों पर चल रहे हैं
हम यहाँ और तुम वहाँ
कभी ये किनारे मिलें
क्या संभव है!

वे कहते हैं कि
धरती और आकाश का मिलन
कहाँ है संभव
चलो क्षितिज बन जाएँ
क्या संभव है!

मुझे तुम्हारी बाँहों का
पूरा आसमान चाहिए
तुम्हारे दिल की पूरी ज़मीन चाहिए
हर दूरी को मिटाकर ऐसे एक-दूसरे का होना
बोलो, क्या संभव है!

विदा समय में अपने अश्रुओं को रोके
अपने अधरों को तुम्हारे अधरों से जब मिलाया था
मेरा कुछ छूट गया था तुम तक
और तुम्हारा कुछ मुझमें सिमट आया था
क्या संभव है वो 'कुछ' एक-दूसरे को लौटा देना!
वो जो रिसता है पल-पल सीने में मेरे
वो दर्द मिटे, कहो क्या संभव है!

संभव और असंभव के इस निरंतर भंवर में
ख़ुद को तुम में खो कर मैंने
जीवन का उत्सव पाया है
कुछ संभव था, कुछ नहीं था लेकिन
तुम ही तुमसे भरे हुए इस हृदय ने
हर पल तुमको ही गाया है
ये गीत मेरी साँसों को चलने देता है
अब ये गीत कहीं मिट जाए
कहाँ ये संभव है

खैर छोड़ो ये जीवन के समीकरण
और व्याकरण की बातें
देखो बारिश का मौसम है
साथ कॉफ़ी पीने ही आ जाओ
क्या संभव है!

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प्रेम रहता है

वो प्रेम, जिसके लिए
राम हज़ारों मीलों का सफ़र तय कर आये
राह की हर बाधा को पार किया
शीघ्र अपने प्रेम तक पहुँचने के लिए असुरों से युद्ध किया

वो प्रेम, जो कृष्ण ने संजोकर रखा मन में
उनका सांसारिक मिलन विदित नहीं
मगर संसार जानता है
राधा द्वारिका के महलों में नहीं थी
मगर कान्हा के ह्रदय में थी

प्रेम हर हाल में अपना स्थान पा लेता है
केवल जो जीता जाए, वो ही प्रेम नहीं
हार कर भी प्रेम सदैव रहता है
एक-दूसरे के हृदयस्थल पर
एक-दूसरे का प्रेम रहता है

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फ़ासले बनाये रखे हैं

दिल में इतने जो राज़ छुपाए रखे हैं
किससे कहूँ कि सबने फ़ासले बनाये रखे हैं
दिल ही को कहते हैं,दिल ही है जो सुनता है
दिल ही दिल में न जाने कितने अफ़साने बनाये रखे हैं
दिल ही में हँसते हैं, दिल ही में रोते हैं
दिल ही दिल में कई ख़्वाब भी संजोते हैं
दिल ही में सजी है सँवरते हुए सपनों की सेज
दिल ही में उनके टूटने के मातम मनाये रखे हैं
कोई मिले ऐसा तो ज़हे-नसीब है
पर कौन है जो दिल के इतने भी क़रीब है!
कि साँसों के हर इक तार अपने
उनकी धड़कनों से बँधाये रखे हैं
दिल में इतने जो राज़ छुपाए रखे हैं
किससे कहूँ कि सबने फ़ासले बनाये रखे हैं

1 Total Review
U

Umesh Mehta

09 October 2025

Very nice. Bahot Bahot Bdhai

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रचनाकार परिचय

निधि व्यास

ईमेल : purohitnidhi@gmail.com

निवास : जोधपुर (राजस्थान)

शिक्षा- कंप्यूटर साइंस इंजीनियर
संप्रति- वर्तमान में एम० बी० एम० विश्वविद्यालय में शोधरत
प्रकाशन- सफ़र, कालन्तर (अमेज़ॉन किंडल) चार साझा संग्रहों में कविताएँ प्रकाशित, हस्ताक्षर वेब पत्रिका में कविताएँ प्रकाशित। प्रतिलिपि पर निरन्तर लेखन।
निवास- जोधपुर (राजस्थान)
मोबाइल- 9461111652