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डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' की क्षणिकाएँ

डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' की क्षणिकाएँ

बहुत देर से
ठहरा हुआ हूँ
इनबाॅक्स में,
शायद तुम लिखोगी कुछ 
या फिर भेजोगी कोई इमोजी,
मौन टूटता ही नहीं,
तुम भी सोच रही होगी 
मुझे ही,
जानता हूँ।

बहुत देर से
ठहरा हुआ हूँ
इनबाॅक्स में,
शायद तुम लिखोगी कुछ 
या फिर भेजोगी कोई इमोजी,
मौन टूटता ही नहीं,
तुम भी सोच रही होगी 
मुझे ही,
जानता हूँ।
 
*************



अम्बर के प्रणय-निवेदन पर
लजा गयी धरती,
मुख से निकला
एक शब्द- "अहा!"
और तब से स्वीकृति का
एक पर्याय 
अहा भी 
हो गया। 
 
*************



जब उसने भेजी 
एक क्यूट मुस्कान वाली तस्वीर 
और लिखा कि-
"रख लो इसे बायीं जेब में 
सेफ़्टी पिन लगा कर।"
तब गलबहियाँ करते,
मैंने साक्षात् देखा-
धरा को अम्बर से मिलते।
 
*************



तुम्हारी पीड़ा- मेरी
मेरी पीड़ा- तुम्हारी 
आओ! तुम्हारी हथेली में 
अपनी पलकों से
रचा दूँ
अपने नाम की 
मेंहदी।
 
*************



मैंने कहा-
"कैसी हो?"
उत्तर मिला-
"तुम्हारे जैसी।",
गढ़ दिया उसने
दो शब्दों में
द्वैत में निहित 
अद्वैतवाद।
 
*************



तुम्हारी मुस्कान की आभा
देती नवजीवन
तुम झूमती प्रकृति
अलक नवपल्लव
अनुभूतियाँ
खिलातीं असंख्य कुसुम
सचमुच
तुम हो, तो बसन्त है।
 
*************



तुमसे मिलने बारिश स्वयं चली आयी 
और तुम 
देखो न मौसम का जादू 
आओ बैठते हैं 
गंगा के तट पर
ढेर सारी बातें करेंगे 
हम-तुम।
 

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रचनाकार परिचय

शैलेष गुप्त 'वीर'

ईमेल : veershailesh@gmail.com

निवास : फ़तेहपुर (उत्तर प्रदेश)

नाम- डॉ० शैलेष गुप्त 'वीर'
जन्मतिथि-  18 जनवरी, 1981
जन्मस्थान-  ग्राम- जमेनी, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
 
शिक्षा- परास्नातक (प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विज्ञान), पी-एच.डी. (पुरातत्व विज्ञान), यूजीसी-नेट, एम.जे.एम.सी., बी.एड., डिप्लोमा इन रसियन लैंग्वेज़, डिप्लोमा इन उर्दू लैंग्वेज़, ओरियन्टेशन कोर्स इन म्यूज़ियोलॉजी एण्ड कन्ज़र्वेशन।
सम्प्रति- उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन शिक्षण-कार्य और क्षणिकाकार एवं माइक्रोपोएट्री कॉस्मॉस का अव्यावसायिक संपादन।
 
प्रकाशन/संपादन-  बिन्दु में सिन्धु, उन पलों में, शब्द-शब्द क्षणबोध, आर-पार, कई फूल - कई रंग, बार्ड्स ऑफ इलूमिनेश्‌न्‌स, कविता दस्तावेज़ है, डॉ. मिथिलेश दीक्षित का क्षणिका-साहित्य, रघुविन्द्र यादव का दोहा-साहित्य, फतेहपुर जनपद के हाइकुकार, व्यंग्य-क्षणिका के पुरोधा : डॉ. परमेश्वर गोयल उर्फ काका बिहारी, डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' के सौ शेर, नयी सदी के दोहे, समकालीन दोहा, क्षणिका काव्य के हस्ताक्षर, इस दुनिया में तीसरी दुनिया, दि अण्डरलाइन क्षणिका विशेषांक, अचिन्त साहित्य दीपावली क्षणिका विशेषांक तथा अन्वेषी के कई वार्षिकांक।
 
अनुवाद-  अनेक यूरोपीय एवं एशियाई भाषाओं यथा ग्रीक, फ्रेंच, जर्मन, चाइनीज, स्पेनिश, अज़रबैजानी, पुर्तगीज, इटैलियन, अल्बानियन, अरेबिक, सर्बियन, क्रोशियन, नेपाली, पंजाबी तथा असमिया आदि में कविताओं का अनुवाद। 
 
प्रसारण-  द डियर जाॅन शो, वारिंगटन, इंग्लैंड में कविता का प्रसारण और स्टोरीफेस्ट 2023, मैक्सिको-ग्रीस-रसिया में लघुकथा का प्रसारण।
विशेष : विभिन्न पत्रिकाओं यथा अन्वेषी, गुफ़्तगू, अनुनाद, अरण्य वाणी, तख़्तोताज, मौसम, शब्द-गंगा आदि के लिए पूर्व/वर्तमान में संपादन, सहसंपादन एवं कार्यकारी संपादन। हिन्दी, अंग्रेज़ी तथा उर्दू की देश-विदेश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं-वेबपत्रिकाओं आदि में और विविध संकलनों में पद्य एवं गद्य की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ प्रकाशित। हिन्दी और अंग्रेज़ी की दो सौ से अधिक पुस्तकों के लिये भूमिका/विमर्श/समीक्षा/आलोचना आदि प्रकाशित। एसोसियेट एडिटर- द वायस ऑफ क्रियेटिव रिसर्च, ई-जर्नल। लघुकथा 'छंगू भाई' पर इसी नाम से लघु फ़िल्म का निर्माण।
 
सम्मान/पुरस्कार-  बेकल उत्साही सम्मान 2017, साहिर लुधियानवी सम्मान 2021, प्रदेश गौरव सम्मान 2023, टीवी प्रोग्राम यू एण्ड लिटरेचर टूडे, नाइजीरिया द्वारा लिटरेरी आइकॉन 2018, डॉ. गणेश दत्त सारस्वत सम्मान 2019, अकबर इलाहाबादी स्मृति सम्मान 2021, साहित्य श्री सम्मान 2022, काव्यांजलि एवार्ड 2012 तथा सृजनशीलता सम्मान 2017 सहित कुछ अन्य सम्मान।
 
सम्पर्क- 18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
पिन कोड- 212601
मोबाइल- 9839942005