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नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

कश्मीरी लाल चावला के हाइकु

कश्मीरी लाल चावला के हाइकु

खामोश लब
कुछ नहीं बोलते
आँखें कहती

 

1.
आकाश बीच
धुंधले बादल हैं
धूप लापता


2.
मौन की भाषा
समझने लगा है
मन का पक्षी


3.
नींद ना टूटी
सपने आते रहे
प्रिय मिलन


4.
आँसू की भाषा
अब कहने लगा
मन का पक्षी


5.
खामोश लब
कुछ नहीं बोलते
आँखें कहती


6.
मानव खोया
पीड़ा के अंधेरे में
आराम कहाँ?


7.
खोया मानव
तम के अंधेरे में
रौशनी कहाँ?


8.
शरद ऋतु
हीटर कर रहे
कमरे गर्म


9.
भर जाते हैं
बड़े-बड़े तालाब
अंत सूखते


10.
झूलते रहे
हम साँसों का झूला
पल में टूटा

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रचनाकार परिचय

कश्मीरी लाल चावला

ईमेल : chawlakashmiri@gmail.com

निवास : मुकतसर (पंजाब)

संपादक- अदबी माला हिंदी मासिक
निवास- मुकतसर (पंजाब)
मोबाइल- 9814814791