Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
के० पी० अनमोल के० पी० अनमोल
निवास रुड़की (उत्तराखण्ड)
भाषा kpanmol.rke15@gmail.com

जन्मतिथि- 19 सितम्बर
जन्मस्थान- साँचोर (राजस्थान)
शिक्षा- एम० ए० एवं यू०जी०सी० नेट (हिन्दी), डिप्लोमा इन वेब डिजाइनिंग
लेखन विधाएँ- ग़ज़ल, दोहा, गीत, कविता, समीक्षा एवं आलेख।
प्रकाशन- ग़ज़ल संग्रह 'इक उम्र मुकम्मल' (2013), 'कुछ निशान काग़ज़ पर' (2019), 'जी भर बतियाने के बाद' (2022) एवं 'जैसे बहुत क़रीब' (2023) प्रकाशित।
ज्ञानप्रकाश विवेक (हिन्दी ग़ज़ल की नई चेतना), अनिरुद्ध सिन्हा (हिन्दी ग़ज़ल के युवा चेहरे), हरेराम समीप (हिन्दी ग़ज़लकार: एक अध्ययन (भाग-3), हिन्दी ग़ज़ल की पहचान एवं हिन्दी ग़ज़ल की परम्परा), डॉ० भावना (कसौटियों पर कृतियाँ), डॉ० नितिन सेठी एवं राकेश कुमार आदि द्वारा ग़ज़ल-लेखन पर आलोचनात्मक लेख। अनेक शोध आलेखों में शेर उद्धृत।
ग़ज़ल पंच शतक, ग़ज़ल त्रयोदश, यह समय कुछ खल रहा है, इक्कीसवीं सदी की ग़ज़लें, 21वीं सदी के 21वें साल की बेह्तरीन ग़ज़लें, हिन्दी ग़ज़ल के इम्कान, 2020 की प्रतिनिधि ग़ज़लें, ग़ज़ल के फ़लक पर, नूर-ए-ग़ज़ल, दोहे के सौ रंग, ओ पिता, प्रेम तुम रहना, पश्चिमी राजस्थान की काव्यधारा आदि महत्वपूर्ण समवेत संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित।
कविता कोश, अनहद कोलकाता, समकालीन परिदृश्य, अनुभूति, आँच, हस्ताक्षर आदि ऑनलाइन साहित्यिक उपक्रमों पर रचनाएँ प्रकाशित।
चाँद अब हरा हो गया है (प्रेम कविता संग्रह) तथा इक उम्र मुकम्मल (ग़ज़ल संग्रह) एंड्राइड एप के रूप में गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध।
संपादन-
1. ‘हस्ताक्षर’ वेब पत्रिका के मार्च 2015 से फरवरी 2021 तक 68 अंकों का संपादन।
2. 'साहित्य रागिनी' वेब पत्रिका के 17 अंकों का संपादन।
3. त्रैमासिक पत्रिका ‘शब्द-सरिता’ (अलीगढ, उ.प्र.) के 3 अंकों का संपादन।
4. 'शैलसूत्र' त्रैमासिक पत्रिका के ग़ज़ल विशेषांक का संपादन।
5. ‘101 महिला ग़ज़लकार’, ‘समकालीन ग़ज़लकारों की बेह्तरीन ग़ज़लें’, 'ज़हीर क़ुरैशी की उर्दू ग़ज़लें', 'मीठी-सी तल्ख़ियाँ' (भाग-2 व 3), 'ख़्वाबों के रंग’ आदि पुस्तकों का संपादन।
6. 'समकालीन हिंदुस्तानी ग़ज़ल' एवं 'दोहों का दीवान' एंड्राइड एप का संपादन।
प्रसारण- दूरदर्शन राजस्थान तथा आकाशवाणी जोधपुर एवं बाड़मेर पर ग़ज़लों का प्रसारण।
मोबाइल- 8006623499


समीक्षा (8 रचनाएँ)

गोविंद गुलशन साहब पुराने को सहेजते हुए नया रचते हैं- के० पी० अनमोल

गोविंद गुलशन साहब हमारे समय के बेह्तरीन ग़ज़लकारों में हैं। ग़ज़ल को उसकी तमाम ख़ूबसूरती के साथ बरतते हुए उसमें अपनी तरह का कुछ जोड़ना इनके लेखन की ख़ासियत है। 'हवा के...

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ग़ज़लों का एक सरस और पठनीय संग्रह : मुन्तज़िर हूँ मैं- के० पी० अनमोल

यह सच है कि ग़ज़ल ने जिस तरह हमारे यहाँ लोगों की भावनाओं को छुआ है, उस तरह कोई और साहित्यिक विधा ये काम नहीं कर पायी। हालाँकि कहानी, कविता और कई छांदस विधाओं ने प...

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जीवन के विभिन्न पहलुओं की तस्वीरों का एक कोलाज : आईने के ज़ाविये- के० पी० अनमोल

पूर्व सैनिक और उम्दा शायर शैलेन्द्र पाण्डेय 'शैल' का ग़ज़ल संग्रह 'आईने के ज़ाविये' पिछले दिनों पढ़ने में आया। साहित्य श्री प्रकाशन, नई दिल्ली से कुछ ही माह पूर्व य...

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ग़ज़लगोई को समझने के लिए भी पढ़ा जाना चाहिए : आसमां तू ही बता- के० पी० अनमोल

आसमां तू ही बता मक़सूद अनवर 'मक़सूद' साहब की कुल 73 ग़ज़लों और 3 नज़्मों का एक ख़ूबसूरत संग्रह है। मक़सूद साहब की शायरी का स्वभाव परंपरागत लहजे का है। उर्दू भाषा, फ़ारस...

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जीवन की हकीकत की शायरी: पागल-पागल कहते लोग- के० पी० अनमोल

'पागल-पागल कहते लोग' आधारशिला पब्लिशिंग हाउस, चंडीगढ़ से प्रकाशित चरणजीत चंदवाल 'चन्दन' का तीसरा ग़ज़ल संग्रह है। 100 ग़ज़लों के इस संग्रह से गुज़रने पर जान पड़ता है क...

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घुप्प अँधेरे में जुगनू-सी कविताओं का संग्रह- के० पी० अनमोल

जब एक ही घर में रहना है  शैलेंद्र शांत जी का कविता संग्रह है। यह उनकी आठवीं कविता-पुस्तक है। संग्रह की कुल 84 कविताओं में दो-एक लंबी कविताओं को छोड़, बाक़ी छ...

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समकालीन यथार्थ का आईना : ये और बात है- के० पी० अनमोल

संजीव प्रभाकर हिंदी ग़ज़ल के परिसर में उभरता हुआ नया नाम है। इनकी ग़ज़लें पिछले कुछ समय में तेज़ी से संज्ञान में आयी हैं तथा जगह-जगह प्रकाशित हुई हैं। अपनी सधी हुई ग़...

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हिन्दी भावधारा की अनूठी ग़ज़लों का संग्रह: पतवार तुम्हारी यादें- के० पी० अनमोल

हिन्दी ग़ज़लों में इस समय अच्छे रचनात्मक माहौल के साथ-साथ प्रयोगात्मकता भी बराबर देखी जा रही है। जहाँ कुछ ग़ज़लकार हिन्दी छन्दों में ग़ज़ल कहने का अभ्यास कर रहे हैं,...

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