Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
आईसीयू में देश- दिलीप कुमार सिंह

"जी इसका नाम कॉफ़ी हाउस है मगर शाम को इस वक्त शायद ही कोई कॉफ़ी माँगता है। लगता है आप यहाँ पहली बार आये हैं। और उधर हँसी-ठिठोली की वजह ये है कि आज गुरुवार है ना।“

उजड़ा चमन- डॉ० मुकेश 'असीमित'

 
गंजापन क्या है? जैसे सिर पर चंद्रमा की पूर्णिमा हो, जो हर रात चमकता रहता है, अपनी खूबसूरती में अडिग, अपने हिस्से की धूप-पानी सहर्ष झेलता है। बालों से जितनी भी तक़लीफें होती थीं, अब सबको अलविदा कह दिया गया है। कोई कंघा इधर-उधर नहीं फेंकना, कोई हेयर क्रीम खरीदने की चिंता नहीं। यह है गंजेपन का सौंदर्य—साधारण, सरल और हमेशा के लिए साथ।

सर्दियाँ धूप सेंकने की- डॉ० मुकेश असीमित

सर्दी तो दरअसल हमारी व्यवस्था का असली आइना है, जो हर साल हमारे समाज की ठंडी पड़ती इंसानियत को, ठिठुरते हुए रिश्तों को, और बेरोज़गारी के थपेड़ों से जूझते नौजवानों को दिखा देती है। सर्दी में ठिठुरते ग़रीब, फाइलों में सिमटी सरकारी राहत योजनाएँ, हीटर के सामने बैठे साहब और सर्द रातों में जम चुकी संवेदनाएँ, यही सर्दियों का असली चित्र है, जो इस बार भी कंबल के नीचे दबी, रजाई में लिपटी और अलाव के सामने ठिठुरती दिखेगी।

मुफ्त मिले जो खाने को, जाए कौन कमाने को- डॉ० सुरेश अवस्थी

देश के जाने माने व्यंगकार डॉ० सुरेश अवस्थी द्वारा लिखित आजकल के दौर के उन परिवारों के विषय में व्यंग आलेख पढ़िए। जिसमें पूरा परिवार सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाकर किस प्रकार सुख सुविधाएँ जुटा लेते हैं।