Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
किसी ने कुछ कर दिया है- अख़्तर अली

लड़का बिगड़ जाये, लड़की हाथ से निकल जाये, आदमी पत्ते और सट्टे में सब कुछ गँवा दें तो पीड़ित पक्ष अपनी सफ़ाई में यह कह सकते हैं कि हमारे परिवार को किसी ने कुछ कर दिया है। यह ज़बरदस्त जादू–टोना है जो हम को उभरने नहीं दे रहा है।

आईसीयू में देश- दिलीप कुमार सिंह

"जी इसका नाम कॉफ़ी हाउस है मगर शाम को इस वक्त शायद ही कोई कॉफ़ी माँगता है। लगता है आप यहाँ पहली बार आये हैं। और उधर हँसी-ठिठोली की वजह ये है कि आज गुरुवार है ना।“

उजड़ा चमन- डॉ० मुकेश 'असीमित'

 
गंजापन क्या है? जैसे सिर पर चंद्रमा की पूर्णिमा हो, जो हर रात चमकता रहता है, अपनी खूबसूरती में अडिग, अपने हिस्से की धूप-पानी सहर्ष झेलता है। बालों से जितनी भी तक़लीफें होती थीं, अब सबको अलविदा कह दिया गया है। कोई कंघा इधर-उधर नहीं फेंकना, कोई हेयर क्रीम खरीदने की चिंता नहीं। यह है गंजेपन का सौंदर्य—साधारण, सरल और हमेशा के लिए साथ।

सर्दियाँ धूप सेंकने की- डॉ० मुकेश असीमित

सर्दी तो दरअसल हमारी व्यवस्था का असली आइना है, जो हर साल हमारे समाज की ठंडी पड़ती इंसानियत को, ठिठुरते हुए रिश्तों को, और बेरोज़गारी के थपेड़ों से जूझते नौजवानों को दिखा देती है। सर्दी में ठिठुरते ग़रीब, फाइलों में सिमटी सरकारी राहत योजनाएँ, हीटर के सामने बैठे साहब और सर्द रातों में जम चुकी संवेदनाएँ, यही सर्दियों का असली चित्र है, जो इस बार भी कंबल के नीचे दबी, रजाई में लिपटी और अलाव के सामने ठिठुरती दिखेगी।