Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
कवि की कार और आलोचक का अलाऊंस- डॉ० प्रमोद सागर

अब जनाब, यात्रा आत्मा की नहीं, इंस्टाग्राम की है। पहले कवि मन से उतरता था, अब 'मॉडल पोज़' में।
अब कवि का दर्द पेट्रोल की तरह है- महँगा भी, ज्वलनशील भी, और कुछ-कुछ फेक भी।

सैयारा का तैयारा- दिलीप कुमार सिंह

इस फ़िल्म में युवक-युवतियाँ (जिन्हें अब ज़ेन ज़ी भी कहा जाता है) अपने वर्तमान प्रेम के साथ फ़िल्म देखने जाते हैं और अपने भूतपूर्व प्रेम (एक्स) को याद करके दहाड़ें मारकर रोते हैं। मैं भी अपनी दफ़्तरी नीरस और उबाऊ दिनचर्या से ऊबकर कर यह ज़ेन ज़ी, मिलेनियल और अल्फ़ा जेनेरेशन की फ़िल्म देखने चला गया।

देवलोक का अमृतकाल बनाम मृत्युलोक में मानवता का पतनकाल- डॉ० मुकेश 'असीमित'

देवर्षि नारद ने इंद्र राजा के कटाक्ष को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा, "देवराज इंद्र! तुम अपने देवत्व पर जो फूल रहे हो न, तुम ही बताओ देवता, दानव और मानव में श्रेष्ठ कौन है?"

किसी ने कुछ कर दिया है- अख़्तर अली

लड़का बिगड़ जाये, लड़की हाथ से निकल जाये, आदमी पत्ते और सट्टे में सब कुछ गँवा दें तो पीड़ित पक्ष अपनी सफ़ाई में यह कह सकते हैं कि हमारे परिवार को किसी ने कुछ कर दिया है। यह ज़बरदस्त जादू–टोना है जो हम को उभरने नहीं दे रहा है।