Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सुषमा भंडारी के माहिए

ये गृहस्थ तपोवन है
खुश हो नारी तो
हर आंगन उपवन है

राजेन्द्र निगम 'राज' के माहिए

इन्सान लड़ाने हैं
मन्दिर मस्जिद तो
बेकार बहाने हैं

लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के माहिए

पीड़ाओं का घर है
जो भी है दुनिया
रहना तो यहीं पर है