Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
लक्ष्मी शंकर बाजपेयी

दुनिया ही बदल जाए
यदि हर कोई ही 
इंसान में ढल जाए

अल्का शरर के माहिए

तू ही मंज़िल तू रस्ता,
नज़रों से दूर रहे
ये हो ही नहीं सकता।

नीलिमा पाण्डेय के माहिए

 
लाखों हों इस जग में,
माई बाबू ही,
बसते हैं,रग-रग में। 

मनवीन कौर पाहवा के माहिए

कुछ ऐसा कर जाएँ
रिमझिम बूँदें बन
सब के हिय को भाएँ