Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
अल्का 'शरर' के माहिए

तुम मेरी हक़ीक़त हो, 
इतना पता है तुम 
जीने की ज़रूरत हो। 

 

लक्ष्मी शंकर बाजपेयी

दुनिया ही बदल जाए
यदि हर कोई ही 
इंसान में ढल जाए

अल्का शरर के माहिए

तू ही मंज़िल तू रस्ता,
नज़रों से दूर रहे
ये हो ही नहीं सकता।

नीलिमा पाण्डेय के माहिए

 
लाखों हों इस जग में,
माई बाबू ही,
बसते हैं,रग-रग में।