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फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

सुषमा भंडारी के माहिए

सुषमा भंडारी के माहिए

ये गृहस्थ तपोवन है
खुश हो नारी तो
हर आंगन उपवन है

आँखों के दर्पण में
तू ही तू है बस
हर एक समर्पण में

 

संसार ये मुझ से है
आदि शक्ति मैं ही
भंडार ये मुझ से है

 

डर-डर के न जियूँगी
संग मैं तेरे हूँ
सुख दुःख सब पियूँगी

 

ये गृहस्थ तपोवन है
खुश हो नारी तो
हर आंगन उपवन है

 

महिला का मान करें
सदियाँ यही कहें
अब तो कुछ ध्यान धरें

 

मैं दर्श की दीवानी
सागर में रहकर
माँगू तुम से पानी

 

हर युग की कहानी हूँ
शुद्ध ही रहने दो
गंगा का पानी हूँ



बेटी न पराया धन
तुलसी का पौधा
इस से महके आँगन

 

महिला कमज़ोर नहीं
उज्जवल धरती है
महिला बिन भोर नहीं

 

पुरुषों का संग दिया
साक्षी हर युग है
खुशियों का रंग दिया

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रचनाकार परिचय

सुषमा भंडारी

ईमेल : koplein@gmail.com

निवास : दिल्ली

जन्मतिथि- 04 अक्टूबर 1965
जन्मस्थान- दिल्ली
लेखन विधा- विविध (गीत, दोहे, मुक्तक, माहिया, गज़ल, क्षणिका, कविता, लघुकथा, कहानी, बाल रचनाएं)
शिक्षा- एम फिल, बी. एड. 
सम्प्रति- अध्यापिका ( दिल्ली सरकार)
प्रकाशन- 20 पुस्तक
सम्मान- उत्कृष्ट अध्यापिका ( दिल्ली सरकार सहित, विविध साहित्यिक संस्थाओं द्वारा लगभग 60)
विशेष- आकाशवाणी दिल्ली
पता- फ्लैट नम्बर- 317 , प्लैटिनम हाइट्स, सेक्टर-18 बी द्वारका नई दिल्ली-110078
मोबाइल- 9810152263