Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

नीलिमा पाण्डेय के माहिए

नीलिमा पाण्डेय के माहिए

 
लाखों हों इस जग में,
माई बाबू ही,
बसते हैं,रग-रग में। 

मौसम यह बदला है,
समय बदलते भी,
कब देरी करता है?
 
 
 
लाखों हों इस जग में,
माई बाबू ही,
बसते हैं,रग-रग में। 
 
 
 
चलना है ज़रूरी भी ,
राह भरे पाथर,
गंतव्य की दूरी भी।
 
 
 
चढ़ता जो नेह तरंग,
नई लगे दुनिया, 
बदले तब जीवन ढंग।
 
 
 
मारो मत जीवों को,
स्नेह करो सबको,
जीवन दो भावों को।
 
 
 
हाथी दाँत लगाकर,
रहते सभी मीत,
ठगते नेह दिखाकर।
 
 
 
पाकर ईश के चरण,
जीवन सफल हुआ।
तुम सभी कर लो वरण।
 
 
 
राम का नाम लिखकर,
ऋषि सभी तर गये,
तुम चलो नाम जपकर।
 
 
 
रात के बाद दिन भी,
उगेगा ही ज़रूर,
आ जाएगा सुदिन भी।
 
 
 
बाँसुरी जब भी बजे,
राधिका हो मगन।
तब रासलीला सजे।
 
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रचनाकार परिचय

नीलिमा पाण्डेय 

ईमेल :

निवास : मुंबई (महाराष्ट्र)

शिक्षा- एम.ए.(हिंदी), एम.ए.(मराठी) बी.एड., पीएचडी                      लेखन विधा- उत्तर आधुनिक वाद की नई कविता,कविता,दोहा, हाइकू, गीत ,ग़ज़ल,मुक्तक 
प्रकाशित पुस्तकें-
1:संवाद खत्म नहीं होते-काव्य संग्रह (1995)
2:धनक नीलिमा -काव्यसंग्रह,(2024)
3:स्त्री और प्रेम - क्षणिका संग्रह 
4:टूटा है अब मौन: डॉ नीलिमा पाण्डेय के प्रेमगीत
प्रकाशनार्थ- निलांबरी के दोहे, नीलम हाईकू, वैदेही की पीड़ा, द्वितीया।
अन्य प्रकाशन- देश की दस से अधिक विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
पुरस्कार/ सम्मान- 25 से अधिक मुख्य व  250 अन्य उल्लेखनीय सम्मान एवं पुरस्कार जो देश की विभिन्न संस्थानों द्वारा प्रदान किए गए है।
विशेष- अध्यक्ष : नीलांबरी फाउंडेशन -केंद्र में स्त्री, कुबेर इंटरप्राइजेज, काव्य सृजन परिवार(महाराष्ट्र महिला)
मोबाइल- 7045547501