Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
फेसबुक की बतकही (माता विमाता और मेरा भ्रम)- डॉ० मीनू अग्रवाल

साहित्य के संसार में मेरी आयु उतनी ही है, जितनी हाल ही में पढ़ी ,महादेवी वर्मा जी की कहानी बिंदा में ,बिंदा की सखी की रही होगी जो अमिट मृत्यु के विषय में इतना ही समझती थी कि "जब उसका सिर कपड़े रखने वाली अलमारी को छूने लगेगा तब वह अपने स्वर्ग गमन नाना दादा से मिलने ज़रूर जाएगी।"

फेसबुक की बतकही- डॉ० मीनू अग्रवाल

डॉ० मीनू अग्रवाल व्यवसाय से बच्चों की डॉक्टर हैं। मगर मन हिन्दी भाषा में नए नए प्रयोग करने में रचता बसता है। भाषा पर पकड़ तो अच्छी है ही साथ ही नए नए प्रयोग करनया आपका प्रिय कार्य है। आप अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकाल कर कविता, लेख व्यंग आदि फेसबुक पर बड़े ही रोचक अंदाज़ में लिखती हैं। 

फेसबुक की बतकही- डॉ० मीनू अग्रवाल

पुरुष निगाहें सबको समान (सम्मान मत पढ़ लीजिएगा) दृष्टि से देखती हैं। उनके शरीर में उठा प्राकृतिक उबाल कोई भी भेद भाव नहीं बरतता ।
एक लिंग, एक दृष्टि !
और प्रबल इतने कि शारीरिक तो क्या, नज़रों से भी रेप कर लेते हैं।

फेसबुक की बतकही- डॉ० मीनू अग्रवाल

डॉ० मीनू अग्रवाल व्यवसाय से बच्चों की डॉ० हैं। अपने मन में उमड़ रहे विचारों के सैलाब को फेसबूक के पटल पर शब्दों के माध्यम से दिशा देने का कार्य करती हैं। आज के आलेख में आप बेतुके सपनों के विषय पर बात कर रही हैं।