Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल- केशुभाई देसाई

डायरी में एक-एक शब्द आँसू की स्याही से लिखा गया था इसलिए जिस किसी ने भी पढ़ी, वह गांधी जी के परम प्रिय नाती के साथ हुए अमानवीय दुर्व्यवहार की हृदय विदारक कथा से व्यथित होकर सन्न रह गया। गांधीनगर में मेरे पड़ोस में रहने वाले बुजुर्ग नेता माधवसिंह सोलंकी ने वह किताब समीक्षा करने के लिए मुझे भेजी। तब तक मैं हमीद कुरेशी से व्यक्तिगत तौर पर मिला नहीं था।

ख़राब बॉस- हर्षा श्री

बड़ा ही मनोरंजक एवं स्मरणीय संस्मरण 

माँ ने कहा था- श्यामल बिहारी महतो

स्कूल के हिंदी शिक्षक और हेडमास्टर शिवदत्त शर्मा के हाथ में पहली बार देखा था निर्मला को। वह कई दिनों से उसे लेकर क्लास में आ रहे थे और और मैं बड़ी ललचाई नज़रों से उसे देखा करता था। पढ़ाते वक़्त एक दिन हेड सर ने मेरी चोरी पकड़ ली। तब मेरा ध्यान पढ़ाई की जगह 'निर्मला' पर था। वह अनुशासन के बहुत पक्के थे। उन्होंने हाथ से खड़े होने का इशारा किये। बोले- "क्लास के बाद ऑफिस में आकर मिलो!" मेरी तो सिटी-पिटी गुम।

आलोचना के सिरमौर नामवर सिंह जी से एक मुलाक़ात- डॉ० कविता विकास


नामवर  सिंह जी ने आलोचना के पहलुओं पर अपने जो विचार दिए और कुछ बिंदुओं पर बात-चीत की शैली में हमारे भी विचार जाने। यह मुलाक़ात और उनके दिशानिर्देश हिंदी के शिक्षकों के लिए मील का पत्थर साबित हुए। वे यादें इसलिए भी अमर हो जाती हैं जिनमे व्यक्ति विशेष से कुछ सीखने को मिला हो और उन पर ध्यानपूर्वक अमल किया गया हो। हमारे आदर्श रहे हिंदी साहित्य के लोकप्रिय आलोचक-साहित्यकार को आज भी याद करके सर श्रद्धा से झुक जाता है।