Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सुधा भार्गव की बाल कहानी 'बादल बरस पड़े'

एक साल उस गाँव का मौसम गड़बड़ा गया। न बारिश हुई और न ही फसल उगी। फसल सूखने लगी। पक्षी भूखे मरने लगे। हर कोई प्यासा। सुनहरी चिड़िया को चिंता सताने लगी। वह अपने दोस्त तोते से मिलने गई। तोता बड़ा बुद्धिमान था। चिड़िया बोली- "वैज्ञानिक महाराज सब समय न जाने क्या सोचते रहते हो! पानी न बरसने से सबके गले सूखे जा रहे हैं। खाने को सब तरस रहे हैं। क्या किया जाए!"

चक्रधर शुक्ल की बालकाविताएं

लिट्टी-चोखा खाओगे।
सत्तू उसमें पाओगे।।

सत्तू जो भी खाएगा।
गर्मी से बच जाएगा।।

शादाब आलम की बाल कविताएँ

बिल्ली है फुलवारी में
फूल सभी दुश्वारी में।

नीता अवस्थी की बाल रचनाएँ

होली का त्योहार आ गया,
मगर नहीं वह आए।
घर-परिवार छोड़ कर अपना,
ड्यूटी सदा निभाए।।