Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
जब जागो, तब सवेरा- प्रियंका गुप्ता

शिक्षा का हर व्यक्ति के जीवन में कितना महत्व है इस को कहानी के माध्यम से बड़ी ही सुंदरता से रचा है सुप्रसिद्ध कहानीकार एवं बाल साहिरीकार प्रियंका गुप्ता। कहानी बेहद दिलचस्प है। एक लड़की, माँ बाप की पिछड़ी सोच के चलते शिक्षा से वंचित कर दिए जाने के पश्चात भी किस प्रकार पढ़ने के रास्ते निकालती है" यह जाने के लिए आप भी पढिए 'जब जागो, तब सवेरा'। 

अंजना बाजपेई की बाल कहानियाँ

एक दिन गर्मी की दोपहर में माँ से नजर बचाकर स्वाति भाई को लेकर खेलने निकल गई। माँ को पता चला तो वहीं पहुँच कर उन्होंने सबके सामने ही दोनों को खूब डाँट लगाई और हाथ पकड़ कर घर ले आई। दूसरे दिन जब स्वाति बच्चों के साथ खेलने गई तो कुछ बच्चे कल की बात पर उसका मजाक उड़ाने लगे, तब स्वाति को बहुत बुरा लगा। उसे लगा कि सचमुच उसकी माँ हर बात पर डाँटती रहती है।

शिव मोहन यादव की बालकथा- चोर की खोज

अगले दिन फिर दरबार लगा। चोरी वाली बात उन्होंने सबके सामने रखी। भालू, बंदर और लोमड़ी को भी बुलाया गया। मंत्री हाथी दादा बोले-‘‘प्यारे बंधुओं! हमारे प्यारे जंगल में कोई चोर घुस आया है, जो खाने-पीने की चीजों पर हाथ साफ करता है। हम सब लोगों को सावधानी से अपने भोजन की निगरानी करनी होगी और पता लगाना होगा कि ये चोर है कौन?‘‘

प्रियंका गुप्ता की बालकथा- हैसियत

विशाल की बात से संध्या बिल्कुल निश्चिन्त हो गई। विशाल सिर्फ़ उसका सहपाठी ही नहीं था, बल्कि एक बहुत अच्छा दोस्त भी था। पढ़ाई के अलावा अन्य क्षेत्रों भी वह उसकी बहुत मदद करता था। वह अक्सर उसे नई-नई जानकारियाँ देता रहता था और उसकी किसी भी परेशानी में सदा उसकी हरसम्भव सहायता करने को तैयार रहता था।