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स्मृतियों, रिश्तों और बदलते समय का अंतर्द्वंद्व : वे लोग- आशा पाण्डेय

स्मृतियों, रिश्तों और बदलते समय का अंतर्द्वंद्व : वे लोग- आशा पाण्डेय

इस कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरी कहानी नायिका के आत्मकथ्य के रूप में सामने आती है। उपन्यास का मूल स्वर गाँव और शहर के बीच फैले जीवन-संघर्ष को पकड़ता है, जहाँ केवल भौगोलिक दूरी नहीं, बल्कि संवेदनाओं की दूरियाँ भी जन्म लेती हैं।

कुछ उपन्यास ऐसे होते हैं, जिन्हें पढ़ते समय लगता है कि हम किसी कहानी को नहीं, बल्कि जीवन की धीमी गति को सुन रहे हैं। 'वे लोग' ऐसा ही उपन्यास है, जहाँ कथा घटनाओं से अधिक मन की आंतरिक हलचलों में घटित होती है। ऐसा लगता है, जैसे पूरा उपन्यास धीरे-धीरे भीतर उतर रहा हो।

इस कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरी कहानी नायिका के आत्मकथ्य के रूप में सामने आती है। उपन्यास का मूल स्वर गाँव और शहर के बीच फैले जीवन-संघर्ष को पकड़ता है, जहाँ केवल भौगोलिक दूरी नहीं, बल्कि संवेदनाओं की दूरियाँ भी जन्म लेती हैं। नायिका की माँ, जो स्वयं शहर की है पर विवाह के कारण गाँव में जीवन बिताती है, इस द्वंद्व की सबसे मार्मिक प्रतिनिधि बनकर उभरती है।

अपनी बेटी को शहर में रखना उसकी दूरदृष्टि का संकेत है, जिसमें वह अपनी परिस्थिति से अगली पीढ़ी को बचा लेना चाहती है। कथानायिका की सोच, व्यक्तित्व माँ के इसी निर्णय की परिणति है। वह शिक्षित, आत्मनिर्भर, संवेदनशील है तथा अपनी एक पहचान बनाती है, पर उसकी जड़ें गाँव से जुड़ी रहती हैं। यही जुड़ाव उसे बार-बार अपने परिवार, विशेषकर माँ और भाई की ओर खींचता है।

भाई का चरित्र इस उपन्यास में विशेष रूप से ध्यान खींचता है। उसका गाँव से शहर जाना, केवल सामाजिक उन्नति नहीं, बल्कि एक जटिल भावनात्मक यात्रा भी है। उसके भीतर का बदलाव, उसका माँ से संबंध, और आगे चलकर उसका आत्मबोध, ये सब एक ऐसी प्रक्रिया को सामने लाते हैं, जो जीवन की वास्तविकता से जुड़ी है। माँ का चरित्र पूरे उपन्यास में एक स्थायी किंतु मौन उपस्थिति की तरह है। बेटे के उपेक्षापूर्ण व्यवहार के बावजूद उसके प्रति माँ का स्नेह भी है और उसके द्वारा भेजे उपहारों को आलमारी की निचली दराज में रखना उसके स्वाभिमान को भी दर्शाता है।

उपन्यास में छोटी मामी और उनकी बेटी का प्रसंग सामाजिक यथार्थ को और व्यापक बनाता है। यह दिखाता है कि पारिवारिक संरचनाओं के भीतर स्त्रियों के जीवन किस तरह निर्णयों के बीच उलझते हैं, और नायिका इस सबको देखते हुए अपने भीतर एक सतत द्वंद्व अनुभव करती है।

कथा का अंतिम भाग, जहाँ माँ के जाने के बाद बेटे का दृष्टिकोण बदलता है और वह गाँव के लिए कुछ करने की सोचता है, उपन्यास को एक आत्मीय पूर्णता प्रदान करता है। यह परिवर्तन किसी नाटकीय मोड़ की तरह नहीं, बल्कि धीरे-धीरे उपजी समझ का परिणाम होता है।

नायिका इस पूरे कथानक में एक संवेदनशील सेतु है। वह न केवल घटनाओं को देखती है, बल्कि उन्हें भीतर महसूस करती है और उसी अनुभव को पाठक तक पहुँचाती है। उसका भीतरी द्वंद्व ही इस उपन्यास का सबसे सशक्त पक्ष है, जो इसे केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन का अनुभव बना देता है।

'वे लोग' अंततः उन लोगों की कहानी नहीं, जिनकी बात कही गई है, बल्कि उन संबंधों की कहानी है, जो हमारे भीतर चुपचाप रहते हैं, समय के साथ बदलते हैं, पर पूरी तरह कभी समाप्त नहीं होते। उपन्यास में आंचलिक बोली का प्रयोग उसे अधिक रोचक और आत्मीय बना देता है। भाषा सहज प्रवाहयुक्त तथा संप्रेषणीय है। पूरा उपन्यास बिना किसी दबाव के स्वयं को पढ़वा ले जाता है और एक अच्छे उपन्यास को पढ़ने का संतोष देता है।

 

समीक्ष्य पुस्तक- वे लोग
विधा- उपन्यास
रचनाकार- सुमति सक्सेना लाल
प्रकाशन- भारतीय ज्ञानपीठ
संस्करण- प्रथम, 2021
मूल्य- 495 रुपए

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रचनाकार परिचय

आशा पाण्डेय

ईमेल :

निवास : अमरावती (महाराष्ट्र)

शिक्षा- एम० ए०, पीएच० डी (प्राचीन इतिहास)
प्रकाशन/प्रसारण- धूप का गुलाब, चबूतरे का सच व खारा पानी (कहानी संग्रह), बादल को घिरते देखा है (यात्रा वृत्तांत), तख्त बनने लगा आकाश (कविता संग्रह), खिले हैं शब्द (हाइकु संग्रह), यह गठरी है प्रेम की (दोहा संग्रह), खट्टे हरे टिकोरे, सोन चिरैया व मैं पंछी बन जाऊं (बाल कविता संग्रह) प्रकाशित। बादल को घिरते देखा है (यात्रा वृत्तांत) पुस्तक उड़िया भाषा में अनूदित एवं प्रकाशित।
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, लेख कविताएँ तथा यात्रा वृत्तांत प्रकाशित।
कई कहानियाँ, कविताएँ मलयालम, उड़िया तथा नेपाली भाषा में अनूदित, प्रकाशित।
आकाशवाणी नागपुर तथा अकोला से कविताएँ तथा कहानियाँ प्रसारित।
पुरस्कार- महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी का 2010-11 का मुंशी प्रेमचंद प्रथम पुरस्कार
श्री राधेश्याम चितलांगिया स्मृति अखिल भरतीय हिंदी कहानी प्रतियोगिता सन- 2011 द्वितीय पुरस्कार
सृजन लोक सम्मान, चेन्नई
ललद्यद शारदा सम्मान, लेह
तुलसी सम्मान, भोपाल
सम्पर्क- 5, योगीराज शिल्प, आई०जी० बंगला के सामने, कैंप, अमरावती (महाराष्ट्र)
मोबाइल- 9422917252