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ख़तरों से आगाह करती हुई ग़ज़लें : उजाले की साजिश- डॉ० ज़ियाउर रहमान जाफ़री

ख़तरों से आगाह करती हुई ग़ज़लें : उजाले की साजिश- डॉ० ज़ियाउर रहमान जाफ़री

एक ऐसे समय में जब आदमी ज़्यादा से ज़्यादा कट्टर हो रहा है, प्रेम का संदेश पहुँचाना इस सदी का सबसे बड़ा ख़तरा है, लेकिन शायर यह काम नहीं छोड़ता।

चाँद मुंगेरी हिंदी में लगातार और पाबंदी से ग़ज़लें कह रहे हैं। 'तलाश सूरज की', 'क्षितिज के पार', 'एक टुकड़ा धूप का' आदि इनकी ग़ज़लों के संग्रह पहले से प्रकाशित हैं। इस बार उनका एक नया संग्रह 'उजाले की साजिश' नाम से प्रकाशित हुआ है, जिसमें लगभग सौ विभिन्न तेवर की ग़ज़लें शामिल हैं। ग़ज़लों के बारे में उन्होंने ख़ुद भी कहा है कि- 'मेरे ख्याल से अच्छी ग़ज़ल वह है, जिसमें सत्य और सार्थक विचार ईमानदारीपूर्वक रखे गए हों।' आगे वह ये भी लिखते हैं कि 'मैंने जो देखा, समझा, महसूस किया उसी भोगे हुए एहसास को आपके समक्ष रख दिया है।'

ज़ाहिर है, उनकी किसी ग़ज़ल में कोई बनावटीपन नहीं है, और नख़यालों की बेवजह ऊँचाइयाँ हैं। उनकी ज़बान में हिंदीपन है, लेकिन ग़ज़ल की लहजे, गुफ्तगू और आत्मा के खिलाफ़ कोई शब्द नहीं ठूंसे गए हैं। उनकी ग़ज़लें उन सूफियों के संसार से निकलकर आती है, जहाँ नफ़रत के लिए कोई जगह नहीं है। एक ऐसे समय में जब आदमी ज़्यादा से ज़्यादा कट्टर हो रहा है, प्रेम का संदेश पहुँचाना इस सदी का सबसे बड़ा ख़तरा है, लेकिन शायर यह काम नहीं छोड़ता।
कुछ शेर आप भी देखें-

बे-हया, बे-अदब, बे-वफ़ा के लिए
हाथ मेरा उठा है दुआ के लिए

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मिट रही है यहाँ आबरू प्रेम की
वो हक़ीक़त बयां लाख करते रहें

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सिर्फ जीना नहीं सर ख़ुशी के लिए
आदमी हम बने आदमी के लिए

इनकी ग़ज़ल की एक सबसे बड़ी ख़ूबी है कि वे हमें ख़तरों से सावधान करते हैं, हमें संसार के चरित्र से आगाह करते हैं, और कई बार हमें उस आंदोलन के लिए आमादा करते हैं, जिसके बिना हुकूमत ने हक़ न देने की रिवायत बना ली है। कुछ और शेर देखें-

सतत हमदर्दी लाचारों से रखना
कभी रिश्ता न मक्कारों से रखना

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आ रहे थे वो तलवार ताने हुए
रोक उनको दिया तो ख़ता हो गई

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जानते हैं सब कि क्या अच्छा मिला
रोशनी के नाम पर धोखा मिला

अपनी साज-सज्जा और मुद्रण से भी यह पुस्तक हमें आकर्षित करती है। बहुत सारे नए काफ़िये भी यहाँ आपको पढ़ने को मिलेंगे। उम्मीद की जानी चाहिए कि हिंदी पट्टी में यह किताब लोकप्रिय होगी।

 

 

समीक्ष्य पुस्तक- उजाले की साजिश
रचनाकार- चाँद मुंगेरी
विधा- ग़ज़ल
प्रकाशक- अयन प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य- 350/- (हार्ड कवर)
पृष्ठ- 116

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रचनाकार परिचय

ज़ियाउर रहमान जाफ़री

ईमेल :

निवास : नवादा (बिहार )

नाम- डॉ.ज़ियाउर रहमान जाफरी
जन्मतिथि-10 जनवरी 1978
जन्मस्थान- भवानन्दपुर,बेगूसराय, बिहार
शिक्षा- एम.ए. (हिन्दी, अंग्रेजी, शिक्षा शास्त्र)बीएड,पत्रकारिता, पीएचडी हिन्दी, यू जी सी नेट (हिन्दी )
संप्रति- सरकारी सेवा

प्रकाशित कृतियाँ-
1. खुले दरीचे की खुशबू- हिंदी गजल
2. खुशबू छू कर आई है- हिंदी गजल
3.परवीन शाकिर की शायरी- हिंदी आलोचना
4.ग़ज़ल लेखन परंपरा और हिंदी ग़ज़ल का विकास-हिन्दी आलोचना
5. हिंदी गजल :स्वभाव और समीक्षा - हिंदी आलोचना
6. चांद हमारी मुट्ठी में है- हिंदी बाल कविता
7. आखिर चांद चमकता क्यों है- हिंदी बाल कविता
8. मैं आपी से नहीं बोलती -उर्दू बाल कविता
9. चलें चांद पर पिकनिक करने- उर्दू बाल कविता
10. लड़की तब हंसती है- संपादन

पुरस्कार एव सम्मान-
आपदा प्रबंधन पुरस्कार,बिहार शताब्दी सम्मान,यशपाल सम्मान तथा शाद अजीबाबादी साहित्य एवं समाज सेवा सम्मान समेत पचास से अधिक सम्मान एवं पुरस्कार

संपादन एवं पत्रकारिता-
संवादिया( बाल पत्रिका)जागृति, निगाह, चल पढ़ कुछ बन, साहित्य प्रभा आदि में सहयोगी संपादक एवं दैनिक हिंदुस्तान समेत कई पत्र -पत्रिकाओं में पत्रकारिता। 

विशेष-
. आकाशवाणी पटना दरभंगा भागलपुर, डीडी बिहार,ई टीवी बिहार आदि से नियमित प्रसारण
. बाल कविता नासिक के पाठ्यक्रम में शामिल
. पीएचडी उपाधि हेतु कई शोधार्थियों द्वारा ग़ज़ल साहित्य पर शोध
. देश भर के कई सेमिनारों और मुशायरों में शिरकत

पता-
C/O-एस. एम इफ़्तेख़ार काबरी
(पेशकार )
शरीफ कॉलोनी,बड़ी दरगाह, नियर बीएसएनएल टॉवर,पार नवादा
ज़िला -नवादा(बिहार) 805112
मोबाइल-6205254255
मोबाइल -9934847941