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अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

रूपम झा के नवगीत

रूपम झा के नवगीत

युवा कवि रूपम झा नवगीत सहित कई विधाओं में समान हस्तक्षेप रखती हैं। रूपम झा के नवगीतों का कथ्य प्रभावशाली है, जो जनपक्षधरता के हित में बेबाक अभिव्यक्त होता है। वे सत्ता के मूल चरित्र को बिना किसी लाग-लपेट के न सिर्फ़ सीधा प्रस्तुत करती हैं बल्कि वाजिब सवाल भी करती हैं। कहना अनुचित न होगा कि इनके गीतों में सामाजिक विसंगतियों की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति है। इनके गीतों में स्त्री साहसी है, प्रतिरोधी है , क्रान्तिकारी चेतना से लैस है।रूपम की वैचारिक ज़मीन निश्चित ही उर्वर है।

- अनामिका सिंह

क्या दिक्कत है

मेरा भी अपना जीवन है
मेरा भी अपना कुछ मत है

तुम क्या पहनो तुम ही जानो
मैं क्या पहनूँ
यह केवल मेरी चॉइस है
और दबाने से दबने वाली
है अब क्या
नये वक्त की यह वॉइस है

रिप्ड जिन्स या टी-शर्ट से
आखिर तुमको क्या दिक्कत है

खिड़की से बाहर भी कुछ है
देख लिया है
और अभी सबकुछ देखूँगी
पहले भी मैं साथ खड़ी थी
साथ रहोगे
तो मैं साथ अभी भी दूँगी

जैसी इच्छा रही तुम्हारी
वैसी ही मेरी हसरत है

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जंग लड़ेगी चिड़िया

जंग लड़ेगी चिड़िया ख़ुद ही
इन तीखे नाखूनों से

रोक नहीं सकता अब कोई
मन में उसने ठान लिया
आसमान तेरे मंसूबों
को भी उसने जान लिया
ऊपर है मरहम-सी बातें
मन में बसी वासना है
चिड़िया समझ रही आँखों में
बाक़ी पानी कितना है

बातों में आएगी ना अब
कह दो बात नमूनों से

चिड़िया अब अपने पंखों से
आसमान को भेदेगी
जो आँखें चुभती है तन को
उन सब को वह छेदेगी
और करेगी बेबश होकर
अब चिड़िया फरियाद नहीं
अब तब जो कुछ होता आया
होगा इसके बाद नहीं

नहीं सहारा चाह रही वो
अब अंधे-कानूनों से

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खंजर-सी लगती हैं आँखें

ताक रही हैं हमें निरंतर
खंजर-सी लगती हैं आँखें

गली-गली की हवा ज़हर है
हर नुक्कड़ से लगता डर है
अब इतने भयभीत शहर में

कैसे हम सच्चाई आँकें

जो चिड़िया कल थी उड़ान में
चहक रही थी आसमान में
आज वही लाचार पड़ी है

कटी मिली हैं उसकी पाँखें

ऐ चिड़िया! कुछ करना होगा
स्वयं कुल्हाड़ी बनना होगा
जिस दरख्त से भय लगता हो

काटो मिलकर उसकी शाखें

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नूतन सपन

नारी त्याग अश्रु आँखों से
रख आँखों में नूतन सपना

सदियों से पीड़ा की मारी
बनी रही अब तक बेचारी
तुझ पर तेरा जीवन भारी
आज बदल दो तुम पथ अपना

दुनिया कितनी नयी हो गई
सुर्ख और सुरमई हो गई
उठो- बढ़ो- गाओ- मुस्काओ
छोड़ो दुख का मंतर जपना

लड़ना होगा, लड़कर हक लो
पूरा-पूरा अंतिम तक लो
बनो प्रेरणा जग की खातिर
छोड़ो रोना और कलपना

फूल तुम्हीं हो, तुम हो माला
मत डालो होठों पर ताला
नियम बदल दो जंगल वाला
सीखो तुम लोहे-सा तपना

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सपने लिए बढ़ी

छोटे मन में छोटे-छोटे
सपने लिये बढ़ी

मेरे सपनों में नदिया थी
जंगल, मेघ, पहाड़
मैंने कभी नहीं चाहा है
निर्जन और उजाड़
मैंने अंधे युग की पुस्तक
अब तक नहीं पढ़ी

मैंने सपने में देखा है
बस आपस का प्यार
मैंने नहीं छीनना चाहा
औरों का अधिकार
किसी लता-सी मैं पेड़ों पर
बिल्कुल नहीं चढ़ी

मेरे बादल मुझमें आकर
करते सुख से वास
हरे-भरे मेरे जीवन में
सुख का है अहसास
मैं अपने अंदर में ख़ुद से
हर दिन रही बड़ी

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जी रहे संसार हम

शोर में भी इस समय की चुप्पियों का
जी रहे संसार हम

धूप सिर पर झेलते हैं, छटपटाते हैं
एक दिन जीवन से बस हर दिन घटाते हैं
जो समर्थक बन गये चुपचाप रहकर के
हैं सहज स्वीकार हम

हम सलाखों में जिये, कब पंख फैलाये
स्वप्न भी बस बंद कमरों के हमें आये
एक डर को जी रहे जो एक अरसे से
सिर्फ वह आकार हम

लांघ पाये हम नहीं अपनी उदासी को
प्यास पूरी ज़िंदगी की, हम रहे हैं ढो
जो हमेशा ही रहे कर्तव्य बनकर ही
हैं वही अधिकार हम

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कमरा उलझा रहा सवाल में

कबसे कमरा
उलझा रहा सवाल में
ख़ुद अपने ही जाल में

मन का कुछ कह पाये
इसकी आदत नहीं लगी
हर दिन उम्मीदें अपनों से
जाती रहीं ठगी

मिले भेड़िये
हर बकरी की खाल में

बढ़ा अगर है मन में तो
अवसाद बढ़ा हर दिन
जीवन भर गहरा सन्नाटा
रहा भोकता पिन

फँसी रहीं इच्छाएँ
सिर्फ बवाल में

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रचनाकार परिचय

रूपम झा

ईमेल : rupamjha755@gmail.com

निवास : वीरपुर, बेगूसराय (बिहार)

जन्मतिथि- 4 मार्च, 1991
शिक्षा- एम० ए० (मैथिली एवं हिन्दी), नेट उत्तीर्ण, पी. एचडी
लेखन विधाएँ- कथा, लघुकथा, गीत, ग़ज़ल, दोहा
प्रकाशित कृतियाँ- 'चल सुबह की बात कर' (नवगीत संग्रह), 'चान ओलती ठाढ़ अछि' (मैथिली दोहा संग्रह)
अनुवाद- 'कहलनि सूफी' (के.पी. रामनुण्णि के मलियालम उपन्यास का मैथिली में अनुवाद), 'अंतरिक्ष में गुनगुन' (मनोज कुमार झा के मैथिली बाल कथा-संग्रह का हिन्दी में अनुवाद), 'चान गवाह' उर्मिला शिरीष के हिन्दी उपन्यास का मैथिली में अनुवाद, 'मैथिली बाल कहानियाँ' (मैथिली बाल कहानियों का हिंदी अनुवाद)
पता- ग्राम व पोस्ट- वीरपुर, वाया- मंझौल, ज़िला- बेगूसराय (बिहार)- 851127
मो०- 7004108267