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लोन की लत- अख्तर अली

लोन की लत- अख्तर अली

कर्ज़ की नीव इनके ख़ानदान में इनके दादा जी ने रखी थी जिसे इनके पिताजी ने आगे बढ़ाया और अब भाई जी इसे उंचाई प्रदान कर बाप दादाओं की विरासत को संभालने की मिसाल पेश कर रहे हैं| भाई जी ख़ानदानी कर्ज़दार हैं|
कर्ज़ा लेना इनका शौक है और शौक से बड़ी कोई चीज़ नही होती| लोन ले ले कर भाई जी लोनवाला के नाम से प्रसिद्ध हो गये हैं | आज लोनावाला से ज़्यादा प्रसिद्ध यह लोनवाला है| अब यही इनका सरनेम है| अपने बेटे की शादी में मंडप पर बैनर लगवाया था जिस पर लिखा था– लोनवाला परिवार आपका स्वागत करता है|

किसी को शराब की लत होती है तो किसी को जुएं की| कोलंबस के वंशज ने इसी प्रकार की तीसरी लत की खोज की है वह है लोन लेने की लत| अभी इस लत को शराब और जुएं की लत की तरह लोकप्रियता नही मिली है लेकिन यह लत तेज़ी से फैल रही है और इसकी रफ़्तार आश्वस्त करती है कि जल्द यह लत शराब और जुए की लत को पीछे छोड़ बहुत आगे निकल जायेगी|
हमारे भाई जी को लोन की लत लग गई है| जब से इन्होने होश संभाला है लोन लेते आये हैं| ऐसी कोई जगह इन्होने छोड़ी नही कि जहां से मिल सकता था और लिया नहीं| मतदान के दिन जिस तरह कार्यकर्ता गली गली के कोने कोने से सूंघ सूंघ कर वोटर तलाशते हैं उसी प्रकार भाई जी लोन देने वाले को ढूंढ़ते है|
जैसे रोज़ सुबह लोग नहा धोकर काम पर निकल जाते है उसी तरह भाई जी कर्ज़ा लेने निकल जाते है| ख़ुदा गवाह है इन्होने कभी ब्याज और किस्त की चिंता नही की है| वो और लोग है जो काम पड़ जाने पर मजबूरी में लोन लेते है लेकिन भाई जी ने हमेशा बिना वजह के ख़ुशी ख़ुशी लोन लिया है| लोन के मामले में भाई जी कभी वजह के मोहताज नही रहे| आप उधारी छाप लोगो के समूह में अपनी इस विचारधारा के कारण मान सम्मान पा रहे है कि उधार लेने के लिये वजह और ज़रूरत पर निर्भर रहना मूर्खता और कायरता है|
कर्ज़ की नीव इनके ख़ानदान में इनके दादा जी ने रखी थी जिसे इनके पिताजी ने आगे बढ़ाया और अब भाई जी इसे उंचाई प्रदान कर बाप दादाओं की विरासत को संभालने की मिसाल पेश कर रहे हैं| भाई जी ख़ानदानी कर्ज़दार हैं|
कर्ज़ा लेना इनका शौक है और शौक से बड़ी कोई चीज़ नही होती| लोन ले ले कर भाई जी लोनवाला के नाम से प्रसिद्ध हो गये हैं| आज लोनावाला से ज़्यादा प्रसिद्ध यह लोनवाला है | अब यही इनका सरनेम है| अपने बेटे की शादी में मंडप पर बैनर लगवाया था जिस पर लिखा था– लोनवाला परिवार आपका स्वागत करता है|
कभी किसी मौके पर किसी चिंता करने वाले ने समझाया कि आखिर कब तक कर्ज़ा लेता रहेगा? कुछ काम धाम कर मेहनत कर| चिन्तक की बात सुन भाई जी को उसकी अक्ल पर तरस आने लगा| उन्होंने कहा – कभी कर्ज़ लिया होता तो समझ में आता इस काम में कितनी मेहनत है|
जब भी कोई काम आया भाई जी ने हुंडी पर दस्तखत किये और पैसा उठाया| बच्चों की पढ़ाई के लिये , इलाज के लिये , हिल स्टेशन जाने के लिये , बच्चों की शादी के लिये तो कभी पुरानी उधारी पटाने के लिये उधार लिया| पत्नी को कभी यह कहने की हिम्मत नही जुटा पाये कि अभी पैसे नही हैं|
कर्ज़ अनेक प्रकार के होते हैं| दूध का कर्ज़, ज़मीन का कर्ज़ , सांसो का कर्ज़, मोहब्बत का कर्ज़ .... लेकिन भाई जी पैसे के कर्ज़ को ही कर्ज़ मानते हैं बाकी कर्ज़ को मर्ज़| इनके प्रिय लोन हैं होम लोन, शिक्षा लोन, यात्रा लोन , कार लोन, गोल्ड लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड लोन| ऐसा नही है कि इन्हें हर प्रकार का ऋण पसंद हैं कुछ ऋण इन्हें सख्त नापसंद है जैसे देव ऋण, पितृ ऋण, गुरु ऋण, लोक ऋण|
बुज़ुर्गों ने समझाया भी कि ब्याज की मार पत्थर की मार से गहरी होती है, ब्याज की सुनामी बर्दाश्त नही कर पाओगे, ब्याज वसूली यातना की कहानी बन जाता है, ब्याज की दीमक जीवन को खोखला कर देगी| बोलने वाले लाख बोले पर लतखोर सुधरते नही हैं | ऐसे लोगों का जब एक पैर कब्र में लटकता है तब भी दूसरा पैर किसी साहूकार के घर में होता है|
कमाऊ लोग अपने बच्चों के लिये संपत्ति और उड़ाऊ लोग कर्ज़ा छोड़ कर मरते हैं| इन उधारी छाप लोगों के जीवन का सूत्र वाक्य है– अल्लाह दे जब खाने को, बंदा क्यों जाये कमाने को | इनकी मान्यता है कि अगर आप चाहते हैं कि मरने के बाद भी याद किये जाओ तो अपने दोस्तों , रिश्तेदारों और पड़ोसियों से ली गई उधारी चुकाए बिना मरो|
शर्ते और नियम पर ये कभी ध्यान नही देते, इन्हें हर शर्त और नियम स्वीकार होते है| लघु कथा, कहानी, निबन्ध, उपन्यास पढ़ते रहते हैं लेकिन कभी लोन फ़र्म पर लिखे शर्त और नियम नही पढ़ते| वहां तो ऐसे दस्तखत करते हैं मानो लोन फ़ार्म पर नही आटोग्राफ़ बुक पर सिगनेचर कर रहे हों|
बैंक और साहूकारों के आफ़िस इनके पर्यटन स्थल है| यहाँ आकर इनका स्वास्थ पहले से ज़्यादा बेहतर हो जाता है, ये अपने को पहले से थोड़ा अधिक
तरोताज़ा महसूस करते हैं| उन दुकानदारों से ये सख्त नफ़रत करते हैं जिन्होने बड़े बड़े अक्षर में लिख रखा है– आज नगद कल उधार , उधार प्रेम की कैंची है| इनका मन करता है कल आकर इनकी कैंची इनके ही पेट में प्रेम से भोक दूँ| उधारी इनके जीवन में इतने अंदर तक घुस चुकी है कि इनकी ज़िंदगी में से उधारी को निकाल दो ज़िंदगी में सुस्त जिस्म के अलावा कुछ नही बचता|
लोन को देने वालों ने नही लेने वालों अधिक प्रसिद्ध किया है| जो लोग म्युच्युअल फंड, रिकरिंग डिपाजिट, फ़िक्स डिपाजिट, ओ. डी. सुविधा , शेयर, सेंसेक्स को ज़रा भी नही समझते वे लोग भी लोन की संपूर्ण जानकारी रखते हैं|
जो पूरी तरह कर्ज़ के दलदल में फस चुके हैं उन्हें तो अब क्या कहे लेकिन जो अभी इस जंगल में प्रवेश नही किये है उनके लिये आलम निज़ामी का यह शेर बहुत ज़रूरी है–
जहाँ  तक हो सके आलम किसी से कर्ज़ मत लेना|
मियाँ ये कर्ज़दारी खैरो ओ बरकत छीन लेती है||

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रचनाकार परिचय

अख़्तर अली

ईमेल : akhterspritwala@gmail.com

निवास : रायपुर(छत्तीसगढ़)

जन्मतिथि- 14 अप्रैल 1960 
लेखन विधा-व्यंगकार, कथाकार, समीक्षक
प्रकाशन
आज की जनधारा में व्यंग्य स्तंभ
लिखित प्रमुख व्यंग्य  नाटक
निकले थे माँगने
क़िस्सा कल्पनापुर का
विचित्रलोक की सत्यकथा
नंगी सरकार
अमंचित प्रस्तुति
खुल्लम खुल्ला  
सुकरात  
अजब मदारी गजब तमाशा  
एक अजीब दास्ताँ  
दर्द अनोखे प्यार के नाक

प्रमुख नाट्य रूपांतरण
ईदगाह (मुंशी प्रेमचंद)
क़िस्सा नागफनी (हरिशंकर परसाई)
अकाल उत्सव (गिरीश पंकज)
मौत की तलाश में (फ़िक्र तौसवी)
टोपी शुक्ला (राही मासूम रज़ा)
बाकी सब खैरियत है (सआदत हसन मंटो)
असमंजस बाबू (सत्यजीत रे)
जितने लब उतने अफसाने (राजी सेठ)
एक गधे की आत्म कथा (कृष्ण चंदर)
बियालिस साल आठ महीने (सआदत हसन मंटो)
सात दिन
तुमने क्यों कहा था कि मै खूबसूरत हूँ (यशपाल)
काली शलवार (एक पात्रीय) (मंटो)
नाक (निकोलाई गोगोल)
प्रमुख नुक्कड़ नाटक
नाटक की आड़ में, लाटरी लीला, खदान दान 
मूलतः व्यंग्यकार, विगत 40 वर्षो से निरंतर लेखन जारी। व्यंग्य , समीक्षा , आलेख एवं लघु कथाओं का निरंतर लेखन। अमृत संदेश, नव भारत , दैनिक भास्कर, नई दुनिया, रांची एक्सप्रेस, जनवाणी, हरिभूमि , राजस्थान पत्रिका ,पंजाब केसरी, वागर्थ, बालहंस,सुखनवर, सामानांतरनामा, कलावासुधा , इप्टा वार्ता, सूत्रधार, कार्टून वाच, दुनिया इन दिनों  उदंती.कॉम, साहित्य सुधा, साहित्यकथा, रचनाकार, अट्टहास, विभोम स्वर, सदभावना दर्पण आदि आदि पत्रिकाओं में निरंतर रचनायें प्रकाशित |
विशेष- हबीब तनवीर से रंगमंच का प्रशिक्षण। अनेकों नाट्य स्पर्धाओं में सम्मेलनों, गोष्ठियों में शिरकत 
सम्पर्क– अख़्तर आली, निकट मेडी हेल्थ हास्पिटल , आमानाका , रायपुर 
मोबाइल- 9826126781