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अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

डाॅ० नीना छिब्बर की क्षणिकाऍं

डाॅ० नीना छिब्बर की क्षणिकाऍं

ख़त लिखना, ख़त में मन खोलकर रख देना, ख़त के इंतज़ार में घड़ियाँ गिनना और ख़त को जान से ज़्यादा संभालकर रखना; इन सब बातों का भी एक ज़माना था। केवल संवाद के लिए नहीं, हालचाल देने-लेने के लिए नहीं बल्कि और भी कितने ही कारण थे ख़तों के लिए पागलपन के। जिन्होंने वह ज़माना जिया है, वे जानते हैं ख़तों की क़ीमत। आज के डिजिटल दौर में ख़त की अहमियत और उसकी ज़रूरत समझातीं हैं नीना छिब्बर जी की ये क्षणिकाएँ।

1.
लिख दे तू
भीतर का दबाव
बहने दे
अंदर की नदी
कोरा काग़ज़
करे इंतज़ार।


2.
पुराने ख़त
अथाह सागर
डूबकर इन में
पा ले
अपने हिस्से के मोती।


3.
ढूँढ फिर से
पुरानी डायरी में रखे
पत्रों की ख़ुशबू
देख फिर महकेंगे
तन-मन और आत्मा।


4.
डिजिटल युग
इमोजी वाली चिठ्ठी
लिखी-पढ़ी ग़ायब
सदा के लिए
यही है नए काल की ताल।


5.
पीले पन्ने
सोने की खान
आशीर्वाद के सिक्के
मूल्यवान ख़जाना
पत्र-परिवार।


6.
बोलना कठिन
क़लम पकड़
बेझिझक लिख
खुलेगा तब ताला
ज़ंग लगे संबंधों का
आएगा उत्तर
मनचाहा।


7.
अकेलापन, सूनापन
वर्तमान की समस्या
भूले लिखना चिठ्ठियाँ
भूले पढ़ना चिट्ठियाँ
भूले‌ संभालना चिठ्ठियाँ।


8.
ख़त के अक्षर
छोटे-बड़े‌ विराम चिह्न
कटे-फटे‌ वाक्य
अधूरी अनगढ़ बातें
कहती सारी सच्चाई।

9.
ख़त में छिपे
सूखे गुलाब
हल्दी के दाग़
कुमकुम की रंगत
अद्भुत चित्रकारी
अकूत संपत्ति
इसे संभाल।


10.
पाती है साथी
रखेगी अपने हृदय में
सारे राज़, रहस्य, कलुष
रख लें संभाल कर
खोलना
जब आए हिम्मत।

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रचनाकार परिचय

नीना छिब्बर

ईमेल : neena.chhibbar@gmail.com

निवास : जोधपुर (राज०)

निवास- जोधपुर (राज०)
मोबाइल- 9461029319