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अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

कश्मीरी लाल चावला के हाइकु

कश्मीरी लाल चावला के हाइकु

वाणी की चोट
गहरे घाव किए
मिटते नहीं

दीप सिखाता
अँधेरे से लड़ना
करें संघर्ष


उड़ारी मारे
समय का जहाज
रुकता नहीं


शहर बीच
मिलते नहीं घर
खड़े मीनार


काँटे बीजे हैं
फिर काँटें उगेंगे
यह ना भूल


एक नेता का
ईमानदार होना
कहाँ लिखा है


वाणी की चोट
गहरे घाव किए
मिटते नहीं


ऊँची चोटियाँ
धूप फैलती जाती
रंगों के साथ


खेतों की सभा
कानों की पंचायत
किस का न्याय


सत्य दर्पण
तोड़ता जो हुंकार
सत्य की जीत


पराली सड़ी
कितने ही मानव
मारती जाती

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रचनाकार परिचय

कश्मीरी लाल चावला

ईमेल : chawlakashmiri@gmail.com

निवास : मुकतसर (पंजाब)

संपादक- अदबी माला हिंदी मासिक
निवास- मुकतसर (पंजाब)
मोबाइल- 9814814791