Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

वसंत जमशेदपुरी के गीत

वसंत जमशेदपुरी के गीत

अभाव तथा वंचना को गाढ़ी संवेदनाओं के साथ शब्द देते वसंत जमशेदपुरी के गीत एक सहृदय के मन को भीतर तक भेद देने की सामर्थ्य रखते हैं। आंचलिक अहसास अपने भीतर समेटे ये गीत हमारे आसपास के परिवेश को पूरी दृश्यात्मकता के साथ प्रस्तुत करते हैं।

हम भूखी परिपाटी हैं

तुम काजल, टिकुली, फुलेल हो,
हम खेतों की माटी हैं।
छप्पनभोग न भाए तुमको,
हम भूखी परिपाटी हैं।।

तुम क्या जानो भूख-ग़रीबी,
क्या जानो तुम लाचारी।
चरण तुम्हारे चूम सदा हम,
युग-युग से हैं आभारी।
तुम उद्गम हो सुर-सरिता के,
हम तो गहरी घाटी हैं।।

आक-जवासा रोदन अपना,
हँसी तुम्हारी पाटल-सी।
अपनी बोली करट-काँव है,
और तुम्हारी माँदल-सी।
तुम मचान हो शाल-काठ के,
हम तो अचकन खाटी हैं।।

वरदानों का अमित कोष तुम,
हम युग-युग से अभिशापित।
रवि-किरणें भी करतीं प्रतिदिन,
कनक-कोट ही आलोकित।
पाँच-सितारा होटल हो तुम,
हम ढाबे की टाटी हैं।।

********


रोटी ढूँढ रहा कूड़े में

रोटी ढूँढ रहा कूड़े में,
मँगरू का बेटा।
खाँस रहा मँगरू खटिया पर,
कबसे अधलेटा।।

अम्मा उसकी गई हुई है,
चौका-बर्तन को,
घूर रहा है चतुर चौधरी,
उसके यौवन को।
खुश है दुखिया आज मिलेगा,
भोजन भर पेटा।।

लाल चाय में डाल मुरमुरे,
सुड़क-सुड़क पीती।
अरमानों की फटी चदरिया,
मन ही मन सीती।
मक्खन-मावा दूर बहुत है,
मिला न सपरेटा।।

निर्धन को क्या काम मान से,
बस चाहे रोटी।
हर कीमत पर माँगे वह तो,
दो रोटी मोटी।
फिर चाहे जग समझे उसको,
हेटी या हेटा।।

********


डामर की सड़कों पर

डामर की सड़कों पर तपती दोपहरी में-
लथपथ-लथपथ मार रहा है मँगरू पैडल।।

बिटिया का घर दूर बहुत है, पर जाना है।
पका हुआ यह भारी कटहल, पहुँचाना है।
चटनी-रोटी खा निकला है, सुबह-सबेरे।
देर न हो जाए ऊपर से, चिंता घेरे।
पोंछ रहा है मुख का सीकर, रह-रह कर वह-
मिल जाती जो छाँव बैठ वह, जाता दो पल।।

हवा बहुत कम है टायर में, धीरे चलती।
हुई पुरानी बाईसीकल, चूँ-चूँ करती।
घंटी केवल बजे नहीं पर, सब कुछ बजता।
किसी तरह कट ही जाता है‌, फिर भी रस्ता।
बस अब तो है चार कोस पर, घर बिटिया का,
देख रही होगी वह रस्ता, आँखें मल-मल।।

जब वह पहुँचेगा बिटिया, दौड़ी आएगी।
मुखमंडल पर देख पसीना, अकुलाएगी।
लग कर गले हाल पूछेगी, फिर माई का।
गुड़िया-सी नन्ही बहना का, फिर भाई का।
फिर कुछ मन की बातें होंगी, हौले-हौले,
बिना मेघ फिर बारिश होगी, दृग से छल-छल।।

3 Total Review
M

Mamchand Agarwal Vasant

16 September 2026

हृदयतल से आभार, बंधुवर

M

Mamchand Agarwal Vasant

16 September 2026

हृदयतल से आभार, बंधुवर

N

Nirmal Praval

16 September 2026

बहुत सुंदर रचनाएं। मन खुश हो गया। बधाई सर जी ☺️

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

वसंत जमशेदपुरी

ईमेल : mavasant1960@gmail.com

निवास : जमशेदपुर (झारखण्ड)

मूल नाम- मामचंद अग्रवाल
जन्मतिथि- 08 दिसंबर, 1957
जन्मस्थान- जमशेदपुर (झारखण्ड)
शिक्षा- आई० कॉम
लेखन विधाएँ- हिंदी, राजस्थानी एवं भोजपुरी में दोहा, मुक्तक, गीत, ग़ज़ल, मुक्त छंद, लघुकथा आदि
प्रकाशन- अँजुरी भर गीत (गीत संकलन), ससुराला (ससुराल पर मुक्तक), महकती हुई रात होगी (हिंदी ग़ज़ल संग्रह), मुट्ठी भर वातास (दोहा सतसई) प्रकाशित।
बाल-बाँसुरी, बिहार के बाल साहित्यकार, इंद्रधनुष, दोहा दर्शन, सुकवि पच्चीसी, त्रिवेणी, सूली ऊपर सेज, साक्षात्कार, आइने के सामने, सत्यम काव्य मेखला, काव्य गुंजना, अभिनव कुंडलिया, 55 हिन्दुस्तानी ग़ज़लें, लघुकथा शतक, करो रक्त का दान, हिंदी ग़ज़ल के साक्षी, कुण्डलिया शतक, आचमन, सँवरता बचपन आदि साझा प्रकाशनों में रचनाएँ प्रकाशित।
इनके अलावा देशभर की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
संपादन- आह्वान, जय भारती, कुरजाँ, राजस्थान नवयुक संघ- मानगो की रजत जयंती एवं स्वर्ण जयंती स्मारिका
सम्मान- काव्य शास्त्री, कविवर बच्चन पाठक सलिल सम्मान, दोहा रत्न, मुक्तक शिरोमणि, मुक्तक समस्या-पूर्ति सम्मान, काव्य दिग्गज, दोहा सम्राट, रचनाकार सम्मान, गीत श्री, श्री साहित्य गौरव सम्मान, कलम की सुगंध- झारखंड गौरव सम्मान, रंग श्री सम्मान, भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार सम्मान, सृजन साहित्य सम्मान, उषा देवी मरुधर साहित्य सम्मान, हिंदी साहित्य शिरोमणि आदि सम्मानों से विभूषित।
सहयोग प्रकाशन द्वारा आयोजित 'आओ बचपन सँवारें' बाल कविता लेखन में गीत 'आओ बच्चो भरें सिकोरा' को द्वितीय पुरस्कार।
संपर्क- सीमा वस्त्रालय, राजा मार्केट, डिमना रोड, मानगो बाज़ार, जमशेदपुर- 831012
मोबाइल- 9334805484