Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

अनुभव राज के गीत

अनुभव राज के गीत

अनुभव राज बेहद प्रतिभासंपन्न युवा रचनाकार हैं। छोटी-सी उम्र में इन्होने अनेक विधाओं में लेखन किया है तथा साहित्य की दुनिया में अपना स्थान निर्धारित किया है। आरंभिक समय में ही इनके पास साहित्य तथा जीवन की अच्छी समझ है, जिसके बूते वे सुगढ़ रचनाओं का सृजन करते हैं। यहाँ प्रस्तुत हैं इनकी गीत विधा की कुछ रचनाएँ, जो जीवन के अभावों-नैराश्यों के भँवर में उतार-चढ़ाव के बावजूद उम्मीद का दामन थामे रहने की प्रेरणा देती हैं। अभाव और निराशाएँ प्राप्ति तथा आशाओं की भूमिकाएँ होती हैं, उनका रचनाकार यह बाख़ूबी जानता है।

- संपादक

तम को दूर करूँ कैसे

इस जीवन में शून्य अधिक हैं
इनका भार सहूँ कैसे

दीवारों में क़ैद है जीवन,
और दुनिया बेगानी।
रिश्ते-नाते प्रेम की बातें,
लगती हैं बेमानी।
इक भँवर में फँसी ज़िंदगी,
इससे पार लगूँ कैसे

दिल ये चाहे मैं किसी के,
जीवन का आधार बनूँ।
कोई मुझको चाहे मैं भी,
उसको दिल से प्यार करूँ।
ज़ख़्म हैं गहरे अवसादों के,
उनकी पीर हरूँ कैसे

प्रश्न हैं गहरे अनसुलझे-से,
उत्तर ढूँढना होगा।
मन की गाँठें खोल हृदय से,
सब कुछ तोलना होगा।
हे ईश्वर! यह शक्ति दो मैं,
तम को दूर करूँ कैसे

********


ज़िंदगी

जबसे पहली साँस भरी
आह ज़िंदगी
तू मेरे साथ चल पड़ी।

मैंने तुझ संग हँसना सीखा,
पल-पल जीना-मरना सीखा।
जब भी गिरा संभाला तूने,
तुझसे साहस भरना सीखा।

जिन राहों पर चल न पाया,
तुमने हाथ बढ़ाया।
मेरे मन के भावों को सुन,
तुमने साथ निभाया।

जब दुनिया विरुद्ध हो खड़ी
आह ज़िंदगी
तू मेरे साथ चल पड़ी।

जब तक अपने भीतर का मैं,
सत्य खोज न लूँ।
जब तक मैं मृत्यु के आगे,
बाँहें खोल न लूँ।

ऐ ज़िंदगी! तू वादा कर ये,
हर पल प्यार करेगी।
धूप-छाँव के इस मेले में,
संग मेरे तू चलेगी।

तू बचपन का पालना
तू बुढ़ापे की छड़ी
आह ज़िंदगी
तू मेरे साथ चल पड़ी।

********


मैं ही जान न पाया

समय-चक्र देता था दस्तक,
मैं ही जान न पाया।

सब लोगों पे जान छिड़कना,
थी मेरी यह आदत।
जो कोई मुझसे प्यार से बोले,
उसकी करूँ इबादत।

ढाई दिन की है बादशाहत,
मैं ही मान न पाया।

तरह-तरह के लोग मिले और,
तरह-तरह के दिल पाए।
ग़लत कोई करता था लेकिन,
मढ़ा किसी के सिर जाए।

कौन था सच्चा, कौन था झूठा,
मैं ही जान न पाया।

जो मुझको समझाते रहते,
उनको बैरी जाना।
मीठी बातों से फुसलाए,
उनको अपना माना।

किन बातों से बचना था,
मैं ही ठान न पाया।।

********


रुक न पाएँगे

यह परीक्षा की घड़ी है,
रुक न पाएँगे।

नव जीवन की शुरुआत है,
और नई हैं राहें।
पथ कंटीलें पाषाणों से,
और न दिखती छाँहें।

हो निराश एक पल भी अब हम,
सुबूक न पाएँगे।

नई उम्मीद से भरकर हमको,
बढ़ते जाना है।
वक्त को मुट्ठी में भरकर के,
चलते जाना है।

हार न मानेंगे जीवन से,
झुक न पाएँगे।।

********


मैं हूँ मजबूर नहीं

माना हूँ कमज़ोर मगर मैं,
हूँ मजबूर नहीं।
मंज़िल मेरी बहुत कठिन है,
लेकिन दूर नहीं।

ये पीड़ा के आँसू मुझमें,
और ही आग भरेंगे।
हिम्मत मेरी और बढ़ेगी,
जितने दर्द बढ़ेंगे।

ठाना है ये मन में अब तो,
है ये फितूर नहीं।
मंज़िल मेरी बहुत कठिन है,
लेकिन दूर नहीं।

पंख हैं मेरे कोमल लेकिन,
नापना नभ है मुझको।
साहस की डोरी को थामे,
आगे बढ़ना मुझको।

मैं थम जाऊँ लक्ष्य से पहले,
ये मंज़ूर नहीं।
मंज़िल मेरी बहुत कठिन है,
लेकिन दूर नहीं।

0 Total Review

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

अनुभव राज

ईमेल : anubhvraj808@gmail.com

निवास : मुज़फ्फ़रपुर (बिहार)

जन्मतिथि- 12 अगस्त, 2004
जन्मस्थान- मुज़फ़्फ़रपुर , बिहार
शिक्षा- डी एल एड ( प्रथम श्रेणी)
स्नातक हिंदी (प्रतिष्ठा) में अध्ययनरत
पुस्तक- चिड़ियों का स्कूल ( बाल कविता संग्रह), अभिधा प्रकाशन, वर्ष 2022
प्रकाशन- नेशनल बुक ट्रस्ट, छपते छपते, हस्ताक्षर, अभिनव बालमन, बाल किरण, प्रेरणा अंशु, अमेरिका से प्रकाशित पत्रिका सेतु, काव्यांजलि, सुवासित, साहित्य सुधा, पद्यपंकज, साहित्य सुषमा ई पत्रिका, नटखट चीनू,  मालंच, सच्चा दोस्त, सिटी फ्रंट अखबार में रचनाएँ प्रकाशित
अन्य - शतरंग साझा संग्रह , सा रे ग म प, हिंदी विभाग ( BRABU) की पत्रिका " नया प्रस्थान " में कविताओं का प्रकाशन,' नयी सदी के स्वर , भाग 3' आदि 
सम्मान- श्री हिंदी पुस्तकालय समिति, डीग द्वारा श्री ग्यासिराम गोयल हिंदी बाल साहित्य सम्मान 2021, स्पार्क ऑफ किलकारी 2022, डॉo ब्रजनंदन वर्मा शिखर बाल साहित्य सम्मान 2023, विद्यादेवी खन्ना बाल साहित्य सम्मान 2023, राज नारायण राय स्मृति साहित्य सेवा सम्मान 2023, अदबी उड़ान विशिष्ट साहित्यकार सम्मान  2023 , भारत गौरव सम्मान 2024, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन,पटना द्वारा विशेष प्रतिभाशाली किशोर सम्मान 2024 आदि।
विशेष-1. NCERT की कक्षा दूसरी की पाठयपुस्तक सारंगी में 'मां ' कविता शामिल
2. राज्य निःशक्तता आयुक्त द्वारा एक दिन का कमिशनर बना
3. दूरदर्शन पर काव्य पाठ
4.राजीव गांधी फाउंडेशन द्वारा चलाये जा रहे ऑनलाइन कार्यशालाओं के अंतर्गत काव्य पाठ, कथापाठ, वाद विवाद, बाल पत्रकारिता, बाल साहित्य,  परिचर्चा एवं अन्य गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी
5. कई प्रतियोगिताओं में स्थान प्राप्त करना ( बालमन फाउंडेशन द्वारा 'मेरी माँ' प्रतियोगिता मे द्वितीय स्थान), प्रेमचंद जयंती समारोह 2016 में काव्य पाठ में प्रथम स्थान और 2019 में द्वितीय स्थान
6. दिव्यांग आइडल एवं अन्य गायन प्रतियोगिताओं में सहभागिता
7. फेसबुक पर लाइव  काव्य एवं संगीत की प्रस्तुति देना
8.  रचनात्मक लेखन कार्यशाला में साधनसेवी की भूमिका में
अभिरुचि- संगीत, पेंटिंग, पर्यटन, कविताएं करना
संपर्क- शशि भवन, आज़ाद कॉलोनी, रोड-3
माड़ीपुर, मुज़फ़्फ़रपुर, प्रधान डाकघर, बिहार-842001
मोबाइल- 8084505505