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जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

निज़ाम फतेहपुरी के दोहे

निज़ाम फतेहपुरी के दोहे

निज़ाम फतेहपुरी के प्रस्तुत दोहे उर्दू स्वभाव की कविताई का आस्वाद हिन्दी छन्द में करवाते हैं। इन दोहों में जीवन-दर्शन, सूफ़ियाना ढंग तथा दुनिया की हक़ीक़त मिलकर एक ऐसा परिवेश रचते हैं कि पाठक-मन मगन हो उठता है। हिन्दी-उर्दू मिश्रित बातचीत की भाषा इन्हें सहज-सरल व बोधगम्य बनाती है।

- संपादक

सच कहना है अब बुरा, कहे यहाँ सच कौन।
सच के दुश्मन हैं सभी, अच्छा है जो मौन।।

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भूल गया है मौत को, लालच से मज़बूर।
तनहा जाना क़ब्र में, फिर भी करे ग़ुरुर।।

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मेरी क्या पहचान है, ढूँढ रहा मैं कौन।
दिखता जो वो मैं नहीं, अंदर कुछ है मौन।।

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फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार

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जीते जी का साथ है, मरने पर है भार।
चले सभी इस पार तक, चले नहीं उस पार।।

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साक़ी ऐसी मत पीला, चढ़कर उतरे यार।
एक बार ऐसी पिला, भव-सागर हो पार।।

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कुछ दिन का बस खेल है, मौत हँसे इक ओर।
बचना मुश्किल मौत से, लाख लगा ले ज़ोर।।

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जिसके दिल में प्यार है, सही वही इंसान।

पत्थर दिल कुछ नफ़रती, घूम रहे शैतान।।

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मांस जला हड्डी बची, राख बची शमशान।

भूल गये अपने सभी, कर्म बची पहचान।।

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उतरी उम्र ढलान पर, रहा अधूरा ज्ञान।

अंत नहीं है मौत से, आगे का कर ध्यान।।

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रचनाकार परिचय

निज़ाम फतेहपुरी

ईमेल : nizamfatehpuri@gmail.com

निवास : मादोकीपुर, फतेहपुर (उ०प्र०)

जन्मतिथि- 01 जनवरी, 1957
लेखन विधाएँ- ग़ज़ल एवं दोहा
निवास- ग्राम व पोस्ट- मादोकीपुर, ज़िला- फतेहपुर (उ०प्र०)
मोबाइल- 6394332921