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फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

कानपुर का नव जागरण भाग नौ- पं० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

कानपुर का नव जागरण भाग नौ- पं० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

6 अप्रैल 1919 को कानपुर में ऐसी विकट राजनैतिक हड़ताल हुई कि नगर में इक्के तांगे तक बंद थे। 13 अप्रैल 1919 को जलियावाला काण्ड ने सम्पूर्ण नगर में प्रतिशोध की ज्वाला सुलगा दी थी। आन्दोलनों के समय कानपुर के दोनों प्रतिद्वंदी दलों में होड़ अच्छी चलती थी।

कानपुर कांग्रेस मे दो गुट

नए विधान के अनुसार कानपुर में भी यह समितियाँ गठित की गईं और कानपुर कांग्रेस भी दो गुटों मे बँट गई। जिला कांग्रेस के सूत्रधार थे प० रामप्रसाद मिश्र। नगर कांग्रेस का संचालन डा. मुरारीलाल और गणेश जी के दल के हाथों में था। दोनों दलों में बनती न थी, दोनों समितियों के कार्यालय थे कानपुर में लेकिन अलग-अलग कारण था, व्यक्तिगत, द्वेष नहीं बल्कि नेतृत्व की स्पर्धा। दोनों दलों की टक्करों से नगर में राजनैतिक चहल पहल बढ़ी और नए जीवन को जन्म मिला। मिश्र जी के गुट में मो० हसरत मोहानी, मो० आज़ाद सुभानी, डा० अब्दुल करीम, प० रघुवर दयाल मिश्र (गुरु जी), प० श्रीरत्न शुक्ल आश्रयदाता थे और इनकी थैली सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओ के लिए खुली रहती थी। श्री मनीराम शर्मा, श्री गंगादीन छावनी वाला और श्री फूलचन्द जैन दल के प्रमुख, श्री जगदम्बाप्रसाद मिश्र ( हितैषी जी), प० रामलाल पांडेय, श्री कैलाशनाथ द्विवेदी आदि थे। श्री मिश्र जी में और मो० हसरत मोहानी मे प्रगाढ़ मैत्री थी और इसे देखकर लोग छींटाकशी भी करते थे। गणेश जी के गुट मे डॉ० मुरारीलाल, श्री अरोड़ा जी, श्री गंगाधर गणेश जोग, प० बाल कृष्ण शर्मा, श्री उमाशंकर दीक्षित, डॉ० जवाहरलाल, इक़बाल कृष्ण कपूर, प० शिवनारायण मिश्र, श्रीकृष्ण दत्त पालीवाल, हमीद खां, लाला प्यारेलाल अग्रवाल आदि। दोनों ही ओर देशप्रेमी, योग्य योद्धा थे। पर चुनावों में विजय श्री गणेश जी के ही दल को वरण करती थी। नगर और जिला की कमेटियों के प्रथम विधिवत निर्वाचित सदस्यों में थे : मो० आज़ाद सुभानी, मो० हसरत मोहानी, डॉ० अब्दुल करीम, श्री उस्मान साहब, साबरी साहब, श्री होड़ीवाला, प० सालिगराम शुक्ल, बानवाले, श्री रूपचन्द जैन, प० मन्नीलाल अवस्थी, श्री गंगाधर गणेश जोग, ला० प्यारेलाल अग्रवाल, श्री उमाशंकर दीक्षित, श्री वीरभद्र तिवारी, प० शिवनंदन मिश्र, श्री लल्लूमल दलाल, डॉ० मुरारीलाल, प० रामलाल शर्मा, प० रघुवरदयाल मिश्र, श्री गणेश जी, श्री अरोड़ा जी, प० रामप्रसाद मिश्र, श्री ब्रजबिहारी मेहरोत्रा, श्री रामस्वरूप गुप्त, श्री बेनी सिंह अवस्थी।
6 अप्रैल 1919 को कांग्रेस ने गाँधी के नेतृत्व में प्रथम देश व्यापी हड़ताल कर विशाल जन आन्दोलन का श्री गणेश किया। इन्हीं दिनों बहुधा, बिना म्युनिसिपल बोर्ड की अनुमति लिए हुए गणेश जी ने सायं सभाओं का आयोजन खुर्दमहल पार्क (श्रद्धानंद पार्क) में डॉ० मुरारीलाल जी की अध्यक्षता में आरम्भ किया। इन छोटी मोटी सभाओं में श्री गणेश जी, श्री अरोड़ा जी, प० रघुवरदयाल भट्ट, गुरु रघुवरदयाल, प० रामप्रसाद मिश्र, मो० हसरत मोहानी आदि के भाषण होते, जिनसे नगर को प्रेरणा मिलती थी। प० बालकृष्ण शर्मा, श्री उमाशंकर दीक्षित, प० द्वारिका प्रसाद मिश्र, श्री छैलबिहारी दीक्षित 'कन्टक', ला० प्यारेलाल अग्रवाल अभी छात्र थे लेकिन वे राजनीति की असिधारा पर चलने का अभ्यास कर रहे थे।
कानपुर में 6 अप्रैल से 13 अप्रैल का सप्ताह बड़ी धूमधाम से मनाया गया। 6 अप्रैल 1919 को कानपुर में ऐसी विकट राजनैतिक हड़ताल हुई कि नगर में इक्के तांगे तक बंद थे। 13 अप्रैल 1919 को जलियावाला काण्ड ने सम्पूर्ण नगर में प्रतिशोध की ज्वाला सुलगा दी थी। आन्दोलनों के समय कानपुर के दोनों प्रतिद्वंदी दलों में होड़ अच्छी चलती थी। गुरु रघुवर दयाल सफेद घोड़े पर बैठकर हड़ताल करा आते थे, प० रामप्रसाद मिश्र और श्रीरत्न शुक्ल ओजपूर्ण संस्कृतनिष्ठ हिन्दी में श्रोताओं में जोश भरते थे, हितैषी जी पर्चे लिखते थे और प० रामलाल पांडेय कार्यालय संभालते थे। गणेश जी के गुट में भी अनेक सहयोगी एवं कार्यकर्ता थे। \ 'प्रताप' तो उनका प्रमुख प्रचार साधन था ही।

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क्रमश:.... 

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रचनाकार परिचय

पण्डित लक्ष्मीकान्त त्रिपाठी

ईमेल :

निवास : कानपुर (उत्तर प्रदेश)

पण्डित अम्बिकाप्रसाद त्रिपाठी के पुत्र पण्डित लक्ष्मीकान्त त्रिपाठी जी का जन्म 20 अक्टूबर 1898 को कुन्दौली, कानपुर में हुआ था। सन् 1918 में क्राइस्टचर्च कालेज कानपुर से बी.ए.करने के बाद लक्ष्मीकान्त जी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. इतिहास विषय मे उत्तीर्ण कर अध्यापन कार्य मे संलग्न हो गये। कानपुर के क्राइस्टचर्च कालेज मे दीर्घअवधि तक अध्यापन व इतिहास विभाग के अध्यक्ष पद पर रहे और एक वर्ष कान्यकुब्ज कालेज के प्रधानाचार्य भी रहे। आपके शोध निबंध सरस्वती, प्रभा, सुधा, माधुरी, प्रताप ,वर्तमान और दैनिक जागरण मे प्रकाशित होते रहते थे। आपने पटकापुर मे अपना निवास बनाया और यहीं पर सन १९४६ ई० बाबू नारायणप्रसाद अरोड़ा व श्याम विजय पाण्डेय के साथ मिलकर कानपुर इतिहास समिति का गठन किया जिसके अध्यक्ष बाबू नारायण प्रसाद अरोड़ा व मंत्री आप बने। उसी वर्ष 1946 में आपने अपने भाई रमाकान्त त्रिपाठी के साथ मिलकर "कानपुर के कवि" और सन 1947 में कानपुर के प्रसिद्ध पुरुष  व 1948 में कानपुर के विद्रोही पुस्तक बाबू नारायण प्रसाद अरोड़ा व श्याम विजय पाण्डेय के साथ मिलकर लिखी व प्रकाशित कराई थी। सन 1950 में कानपुर का इतिहास भाग-1 व 1958 में कानपुर का इतिहास भाग-2  बाबू नारायण प्रसाद अरोड़ा के साथ मिलकर लिखी व प्रकाशित कराई थी। राय देवीप्रसाद पूर्ण की कविताओं का संकलन व सम्पादन "पूर्ण संग्रह" के नाम से किया जो गंगा पुस्तकमाला, लखनऊ से प्रकाशित हुआ था। 
    आपके दत्तक पुत्र डा.अनिल मिश्र (बब्बू)  डी. ए. वी. कालेज मे इतिहास के प्रोफेसर रहे। आपका निधन कठेरुआ मे वर्ष १९८१ मे हुआ। आप स्थानीय इतिहास के साथ साथ साहित्य संस्कृति राजनीति धर्म व समसामयिक विषयों पर निरन्तर लिखते रहते थे। आपका पटकापुर कानपुर का पाठागार बहुत ही समृद्ध था ।