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आमिर ख़ान की शादी और लोगों का दर्द - मुकेश नेमा

आमिर ख़ान की शादी और लोगों का दर्द - मुकेश नेमा

आमिर ख़ान को बधाई। मात्र इकसठ साल के ये बाँके जवान भाग्यशाली है। सिल्वर स्क्रीन पर ख़ुद से आधी उम्र की कन्याओं से रोमांस करने के साथ साथ ये सुख उन्हें अपने घर मे भी हासिल है। सठिया चुके आमिर इस बार गोरी गौरी स्प्रेट के दूल्हा बने हैं। इनकी तारीफ़ इसलिए भी की जाना चाहिए क्योंकि ये इनकी तीसरी दुल्हन हैं और ये हर बार पिछली बीवी से पाँच बरस छोटी लड़की तलाश लेते हैं। ज़ाहिर है इस ख़बर से रंडुए रो पीट रहे हैं और उन कुँवारों की छाती पर साँप लोट रहे हैं। 

आमिर ख़ान को बधाई। मात्र इकसठ साल के ये बाँके जवान भाग्यशाली हैं। सिल्वर स्क्रीन पर ख़ुद से आधी उम्र की कन्याओं से रोमांस करने के साथ-साथ ये सुख उन्हें अपने घर मे भी हासिल है। सठिया चुके आमिर इस बार गोरी गौरी स्प्रेट के दूल्हा बने हैं। इनकी तारीफ़ इसलिए भी की जाना चाहिए क्योंकि ये इनकी तीसरी दुल्हन है और ये हर बार पिछली बीवी से पाँच बरस छोटी लड़की तलाश लेते हैं। ज़ाहिर है इस ख़बर से रंडुए रो पीट रहे हैं और उन कुँवारों की छाती पर साँप लोट रहे हैं, जो बरसों पहले बिना घोड़ी का मुँह देखे एक्सपायरी डेट पार कर चुके। और जिनके हिस्से में बस बाराती होने के ही अवसर आये हैं।

बहरहाल ऐसे सभी कुँवारे, शादीशुदा के अलावा ऐसे जीव, जो केवल पुरुष होकर पैदा हुए हैं, ऐसे नकारात्मक लोग, जिन्हें यह ख़बर ज़हर जैसी लग रही है, मेरी राय को कान खोलकर सुनें। पहली बात तो ये कि सुंदर, सुलक्षणा कन्याएँ मात्र योग्य वर का ही वरण करती हैं। हम वीर भोग्या वसुंधरा वाले देश हैं। गधों को सेवन कोर्स लंच-डिनर नहीं मिलता। ऐसे में हमारे निडर ट्रकों के पीछे लिखी उस अमर सूक्ति का स्मरण रखें, जो हमें स्वस्थ्य प्रतियोगिता के लिये प्रेरित करती है। हम सभी ने पढ़ा है उसे, 'जलो नहीं, बराबरी करो'। ऐसे में आप ये जो स्वस्थ-प्रसन्न, ज़हीन-क़ामयाब अमीर आमिर ख़ान का मज़ाक़ बना रहे हैं, वो बस ये बताती है कि आप अंदर ही अंदर कलप रहे हैं, मरे जा रहे हैं आमिर ख़ान होने के लिए, पर हो नहीं पा रहे।

सच तो यह है कि बुढ़ापे में शादी करने का मतलब बूढ़ा होने से इनकार कर देने जैसा है। नई दुल्हन लेकर आये किसी बुज़ुर्ग के चेहरे की चमक देखें। बंदा फेरे लेते ही बीस बरस कम हो जाता है। बुज़ुर्गवार दूल्हे खाँसने-खखारने में, विश्वास नहीं रखते। बुढ़ापे में ब्याह च्यवनप्राश-सा प्रभावी है, वे चुस्त दुरुस्त हो लेते हैं फ़ौरन। दौड़ते-भागते हैं और फ़िट बने रहना चाहते हैं। स्वस्थ्य इंडिया बनाने में सबसे ज़्यादा योगदान बूढ़े दूल्हों का होता है। उनकी ख़ूबसूरत दुल्हन को देखकर पूरी कॉलोनी, पूरा गाँव, पूरा शहर फ़िट होने के प्रति आग्रही हो जाता है। तोंदों की शामत आ जाती है। स्पोट्स शू की बिक्री बढ़ जाती है एकाएक, सारे नागरिक सुबह, दोपहर, शाम दौड़ना शुरू कर देते हैं। पूरी कोशिश करते हैं कि उनके रास्ते में इस नवविवाहित बुज़ुर्ग दूल्हे का घर ज़रूर पड़े। अमिताभ बच्चन ने भी बताया ही है कि देश की इकॉनामी तभी स्वस्थ्य रह सकेगी, जब देश में हर आदमी स्वस्थ हो। ऐसे में स्वस्थ, पुनः विवाहित बूढ़े, देश की इकॉनामी में उत्प्रेरक का काम करते हैं। और फिर आसपास के दस-बीस किलोमीटर के इलाक़े में क़ानून और व्यवस्था सुधर जाती है। लोग नववधू के समक्ष, अनुशासित, सभ्य और शांतिप्रिय दिखने के लिये मरे जाते हैं। शादीशुदा जोड़े से नमस्ते करने के चक्कर में पूरे गाँव के कुत्ते-बिल्ली तक को प्रणाम करने लगते हैं लड़के। ज़ाहिर है अमन चैन और भ्रातृत्व का वातावरण बनता है इससे। पुलिस और कोर्ट के पास ज़्यादा काम नहीं रह जाता। बतौर नागरिक, राज्य आपसे और क्या अपेक्षा कर सकता है?
आसपास रहते सारे अधेड़, बाल रंगवाने के लिये लाइन लगा लेते हैं हेयर कटिंग सेलून पर। बाल काटने वाला होशियार बंदा इन्हे फेशियल, मेनीक्यौर, पैडीक्यौर के बिना जाने जाने नहीं देता। नये चलन के कपड़े ख़रीदने बिना कैसे रह सकता है मोहल्ला। ऐसे में शहर के खड़खड़ाते बुजुर्गों के अलावा कपड़ों की दुकान में जान आ जाती है। ड्राई फ्रूट्स की दुकानें जगमगाने लगती हैं। देश की अर्थव्यवस्था को चार चाँद लगने की स्थितियाँ निर्मित होने लगती है। किसी भी बुजुर्ग के शादी करने के ये देश, समाज और दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव है।

और फिर सबसे बड़ा लाभ, निकटवर्ती सारे लोग आशावादी और ख़ुशमिज़ाज हो उठते हैं। ऐसा लगता है कि अब आनंद मंत्रालय की कोई ज़रूरत ही नहीं रही हमें। सारे रिश्तेदार, अड़ौसी-पड़ौसी, मिलनसार होकर ऐसे प्रेम से भर जाते हैं, कि उन पर भरोसा करने का मन होने लगता है। ज़िंदा रहने के लिये आप और क्या चाह सकते हैं!

ऐसे में मन बड़ा कीजिए। बधाई दीजिए आमिर ख़ान को। प्रार्थना कीजिए भगवान से कि आमिर जैसे अमीर, क़ाबिल और क़िस्मत के धनी बनें आप भी। ऐसा सुअवसर आपके जीवन में भी उपस्थित हो और कोई गोरी गुलाबी महिला आपके आँगन मे भी गुल खिलाए। ऐसा होना मुश्किल तो है पर सपने देखने में कोई बुराई भी नहीं। भगवान कब किसकी क़िस्मत का छप्पर फाड़ दे, यह भी नहीं कहा जा सकता। मुमकिन है वो अगली दफ़ा जिससे राजी हों, वो आप ही हों। और जब तक ऐसा नही होता, आपको ठंडा पानी पीना चाहिए और बिना रोए-पीटे, किसी को कोसे बगैर सब्र करना चाहिए।

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रचनाकार परिचय

मुकेश नेमा

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निवास : इंदौर (मध्य प्रदेश)