Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

यादों में रोशन चराग़- रेहान सिद्दीकी

यादों में रोशन चराग़- रेहान सिद्दीकी

गोविंद गुलशन सिर्फ़ एक शायर नहीं थे, वो मुहब्बत का चलता-फिरता पैग़ाम थे। ऐसी रोशनी, जो नफ़रत के अँधेरों में भी इंसानियत जगाती रही और जो अपनी शायरी के ज़रिए हमेशा ज़िंदा रहेगी।

आदरणीय गोविंद गुलशन जी का नाम आते ही सबसे पहले उनकी शख़्सियत का वह रोशन नक़्श उभर आता है, जिसमें सादगी, अपनापन और मुहब्बत एक साथ मुस्कराते नज़र आते थे। उनका लहजा सिर्फ़ एक बड़े शायर या बड़े कवि का लहजा नहीं था, बल्कि उस अज़ीम इंसान की आवाज़ थी, जिसने शायरी को महज़ अभिव्यक्ति या इज़हार नहीं, बल्कि मुहब्बत और प्यार का एक मिशन बना लिया था- ऐसा मिशन, जो नफ़रत के अँधेरों में भी इंसानियत के उजाले बिखेर देता है।

गोविंद गुलशन जी से मेरी मुलाक़ातें गिनती की ही रहीं, मगर वो उन शख़्सियतों में से थे, जिनसे एक बार भी मिल लिया जाए तो उनकी मौजूदगी ज़ेह्न और दिल में हमेशा के लिए महफ़ूज़ हो जाती है। उनकी बातचीत में ठहराव था, नज़र में अपनापन और शब्दों में ऐसा यक़ीन और विश्वास कि सामने वाला किसी अनजाने एहसास के साथ उनका हो जाता था। वे कम बोलते थे, और शायद इसी वजह से ज़्यादा सुने जाते थे, बल्कि महसूस किए जाते थे।

उनकी शायरी की तरह उनकी ज़िंदगी भी मुहब्बत और रोशनी की तफ़्सीर थी। यही वजह है कि आज भी उनका नाम एक शायर से बढ़कर एक इंसान के तौर पर याद किया जाता है। बज़ाहिर उन्होंने हमारा साथ छोड़ दिया है, लेकिन अज़ीम शायर कभी मरते नहीं, वे अपनी रचनाओं में हमेशा-हमेशा ज़िंदा रहते हैं।
आज हमें भी उनका यह शेर बहुत याद आ रहा है-

बुझा  रही  है  चराग़ों  को वक़्त से पहले
न जाने किसके इशारों पे चल रही है हवा

0 Total Review

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

रेहान सिद्दीकी

ईमेल :

निवास : dubai