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नए प्रयोग और सशक्त कहन का नायाब नमूना : मकड़जाल- रामकुमार भाम्भू

नए प्रयोग और सशक्त कहन का नायाब नमूना : मकड़जाल-  रामकुमार भाम्भू

संग्रह में सात लम्बी कहानियाँ हैं, जिनमें से अधिकतर किसी न किसी पत्रिका में छपी है और शेष छपने के लिए स्वीकृत हैं। नई विषय-वस्तु और कहन का अंदाज़ लम्बी कहानियों को पठनीय बना देता है।

समकालीन सक्रिय कथाकारों में एक महत्वपूर्ण नाम श्री राजेन्द्र श्रीवास्तव का है। बैंकिंग जैसे क्षेत्र में उपमहाप्रबंधक पद का महत्वपूर्ण कार्यभार संभालते हुए निरन्तर सृजन करना और सृजन भी इस स्तर का, जो एक नया माइलस्टोन खड़ा कर दे, वाक़ई हिम्मत का काम है।

हाल ही मैं इनका कहानी संग्रह मकड़जाल सामने आया। संग्रह में सात लम्बी कहानियाँ हैं, जिनमें से अधिकतर किसी न किसी पत्रिका में छपी है और शेष छपने के लिए स्वीकृत हैं। नई विषय-वस्तु और कहन का अंदाज़ लम्बी कहानियों को पठनीय बना देता है। राजेन्द्र श्रीवास्तव जी की ख़ासियत है कि वे बिल्कुल अलहदा विषय को उठाते हैं और अपने शब्दों की बाजीगरी से ऐसा ताना-बाना बुनते हैं कि पाठक को पता ही नहीं चलता कि कब वो 15-20 पेज पढ़ जाता है।

अब बात करते हैं सिलसिलेवार संग्रह की कहानियों के बारे में। अलौकिक घटना मकड़जाल संग्रह की पहली कहानी है। रहस्य और रोमांच से भरपूर इस कहानी में राजेन्द्र श्रीवास्तव जी ने क्या ग़ज़ब शब्दों की कलाकारी की है। प्रेम का एक अनोखा रंग इस कहानी में देखने को मिला। प्रेम वाक़ई अमर है, चाहे कोई माने या ना माने। प्रेम के रिश्ते को कोई कितनी शिद्दत से निभा सकता है, यह इस कहानी की प्राप्ति है। लौकिक जीवन में अलौकिक कहानी। प्रेम की पराकाष्ठा और 'गुनाहों का देवता' को दुबारा जीना वाक़ई बेहद मार्मिक चित्रण किया है।

सात क्रांतिकारी एक प्रयोगात्मक कहानी है, जो एक साधारण-सी घटना के माध्यम से अपने सिद्धांतों पर अडीग रहने और सही फ़ैसले की सीख देती है। राजेन्द्र श्रीवास्तव कहानियों का स्तर इतना ऊंचा रखते हैं कि पाठक विस्मित हो जाता है। 'जन्नत के बगीचे का फूल' ऐसी ही कहानी है। प्रेम का ऐसा रूप कहाँ देखने को मिलता है! कहन इतनी सशक्त है कि पाठक एक साँस में कहानी पढ़ जाता है। लम्बी कहानियाँ अक्सर पाठक को विभ्रम में डाल देती है परन्तु आपकी कहानियाँ इस कदर बांध लेती हैं कि बीच में छोड़ने का मन ही नहीं करता। कहानी के सूत्रधार और ईशल का प्रेम बानगी है, प्रेम के साथ ज़िम्मेदारी की।

न्याय इस संग्रह की अलग तरह की कहानी है। ऐसा प्रयोग पहली बार देखने को मिला। तत्कालीन परिस्थितियों में समाज में नैतिक मूल्यों की इतनी गिरावट भी आ सकती है, चिंता का विषय है। यह हक़ीक़त है और हमारे आसपास ही ऐसी दुखद घटनाएँ घटित होती हैं और हम देखते रह जाते हैं। आख़िर क्यों? कमी तो हमारी भी है। बहुत से प्रश्न इस कहानी के माध्यम से पाठक तक पहुँचते हैं, जिन पर लम्बी बहस हो सकती है। परन्तु कोई सार्थक हल तो निकले! बहरहाल यह प्रयोग पसंद आया।

ईजा का कोट मार्मिक कहानी है। ग़रीबी और बीमारी हालात को इस कदर बदल देते हैं कि छोटी-छोटी बातों में सुख खोजना भी मुश्किल हो जाता है। बाल मनोविज्ञान इस कहानी का सशक्त भाग है। फेक्ट्री के कार्यालय में ईजा का कोट और आख़िर में सूत्रधार को ईजा के हर परिधान में मरियम नज़र आना कहानी को लाजवाब बना देता है।

संग्रह के फ्लैप पर खोने का सुख कहानी का अंश पढ़कर ही लगा था कि यह कहानी कुछ अलग है। बदलते समय के साथ आजकल के बच्चे जब केवल अपने कैरियर और सुख के पीछे परिवार नाम की संस्था से दूर भागने की कोशिश कर रहे हैं तब ऐसी रचनाएँ परिवार का असली मतलब समझाने का काम करती हैं। एकल परिवार के दौर में संयुक्त परिवार की क्या अहमियत है, यह इस कहानी में उभर कर सामने आता है। सबसे बड़ी बात किसी को खोने पर दुःख होना स्वाभाविक है परन्तु इस दुःख में भी सुख तलाश लेने की सीख इस कहानी को अलग बनाती है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह कहानी लम्बे समय तक याद रहेगी।

संग्रह की शीर्षक कहानी मकड़जाल बहुत ही उम्दा है। एक ऐसे इंसान की कहानी, जो सुख की तलाश में बाहर ऐसे सम्बन्धों की तलाश में भटकता है, जहाँ कोई ख़तरा न हो। ऐसे में एक ग़रीब की सच्ची माँग भी मकड़जाल नज़र आती है। भूख से बड़ी बीमारी कौनसी होती है! मंदा और सूत्रधार दोनों पात्र कितने-कितने छद्म आवरणों को बे-पर्दा करते नज़र आते हैं। कोरोना काल की वास्तविक मार जिस स्तर के लोगों पर पड़ी है, उनका सच्चा प्रतिनिधित्व मंदा कर रही है और जो केवल मौक़े का फ़ायदा उठाने की ताक में रहते हैं, उन पर रचनाकार ने मंदा के माध्यम से करारी चोट की है। कहानी का अंत तथाकथित सभ्य और चालाक समझने वाले समाज पर एक तमाचे की तरह है। कोरोना की पृष्ठभूमि में समाज के निचले तबके की समस्याओं का द्रवित करने वाला वर्णन कहानी की ताक़त है।

समग्र रूप में कहें तो इस संग्रह में शामिल कहानियाँ अपने शब्द-शिल्प, कहन और नए प्रयोग के लिए लम्बे समय तक याद रहेंगी। कहानियों की बुनावट इतनी सघन है कि पाठक क्षणभर के लिए भी इधर-उधर नहीं हो पाता है। एक सशक्त कहानी संग्रह के लिए राजेन्द्र श्रीवास्तव जी बधाई के पात्र हैं।

 

 

समीक्ष्य पुस्तक- मकड़जाल
रचनाकार- राजेन्द्र श्रीवास्तव
विधा- कहानी

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रचनाकार परिचय

रामकुमार भाम्भू

ईमेल : ramkumar.bhambhu1112@gmail.com

निवास : सूरतगढ़ (राजस्थान)

संप्रति- अध्यापन
प्रकाशन- विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, समीक्षा आदि प्रकाशित।
निवास- सूरतगढ़, ज़िला- श्रीगंगानगर (राजस्थान)
मोबाइल नंबर- 9828440030