Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

मुझसे उनका लगाव कुछ अलग ही तरह का था- दीपक जैन 'दीप'

मुझसे उनका लगाव कुछ अलग ही तरह का था- दीपक जैन 'दीप'

मेरी ज़िंदगी मे आपके होने के तसव्वुर को मैं शायद आज तक कोई नाम नहीं दे पाया हूँ। आपके सुलूक़ से कभी लगता था कि आप मुझे अपना भाई समझते हैं, कभी लगता था दोस्त समझते हैं, कभी लगता था आप मेरी रहबरी फ़रमा रहे हैं, कभी बच्चों की तरह दुलार रहे हैं।

मेरे अज़ीज़म गुरुभाई आदरणीय गोविन्द 'गुलशन' साहब के जाने से एक अजीब-सा सूनापन, एक अजीब-सी पीड़ा और जाना-पहचाना दुःख दिल के किसी कोने में छटपटाता हुआ महसूस होता है। आपसे मेरी पहली मुलाक़ात उस्ताद मुहतरम के दयार में हुई थी, जहाँ से हमें महोबा मुशायरे में शिरकत के लिए जाना था। उस पहली मुलाक़ात में ही लगने लगा था कि हमारी पहचान नई नहीं है।

उस वक़्त जिस अपनाइयत के साथ आपने हमारा माथा चूमकर गले से लगाया था, वही अहसास उस आख़िरी वक़्त भी हुआ था, जब आप हॉस्पिटल में एडमिट थे। वही चमक और वही मुहब्बत उनकी आँखों मे तैरती हुई महसूस हुई थी, जो पहली मुलाक़ात के बाद सारी उम्र मेरे साथ सफ़र करती रही। आदरणीय गोविन्द जी से मेरे तआल्लुक़ात करीब 30 बर्षों के रहे हैं। इस दौरान बहुत सारा वक़्त उनकी क़ुर्बतों में गुज़रा है। मुझसे उनका लगाव कुछ अलग ही तरह का था। मेरी ज़िंदगी मे आपके होने के तसव्वुर को मैं शायद आज तक कोई नाम नहीं दे पाया हूँ। आपके सुलूक़ से कभी लगता था कि आप मुझे अपना भाई समझते हैं, कभी लगता था दोस्त समझते हैं, कभी लगता था आप मेरी रहबरी फ़रमा रहे हैं, कभी बच्चों की तरह दुलार रहे हैं।
यक़ीन जानिए आपका साथ ईश्वर की बे-शुमार नवाज़िशों की सफ़े-अव्वल में शामिल रहा है। मेरी कितनी ही ग़लत ख़्याली आपकी सोहबतों में बहुत आसानी से दूर हो जाती थीं। इतना लगाव, इतनी आत्मीयता, हमदर्दी और अपनाइयत मुझे आपसे नसीब हुई है, जिनकी यादें मेरा सरमाया है।

आपकी सोहबतें एक अदबी दयार में बैठने के अहसास को मुअत्तर कर देने वाली थीं। कहते हैं कि वक़्त हर दुःख दर्द की दवा है, धीरे-धीरे खोने के ग़म के साथ रहने की आदत हो जाती है लेकिन मोहतरम गोविन्द जी जैसी बेहद ज़हीन और बा-वक़ार शख़्सियत के बिछड़ने का कर्ब और ख़ालीपन शायद इससे जुदा है।

मैं अपनी इस व्यक्तिगत पीड़ा को सही लफ़्ज़ नहीं दे पा रहा हूँ। बस ईश्वर से दुआ है कि मेरे प्यारे गुरुभाई मोहतरम गोविन्द 'गुलशन' साहब को अपने श्रीचरणों में स्थान देकर उनके अपने और परिवार वालों को आत्मबल प्रदान करे।

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रचनाकार परिचय

दीपक जैन 'दीप'

ईमेल : deepakjaindeep@gmail.com

निवास : guna

नाम - दीपक जैन 'दीप'
जन्म तिथि- 01.05.1963
जन्म स्थान - गुना (म.प्र.)
शिक्षा - एम.कॉम.
सम्प्रति - जल संसाधन विभाग से सेवा निवृत
प्रकाशन - नींद के टुकड़े
प्रसारण - प्रसार भारती और दूरदर्शन के माध्यम से प्रसारण।
सम्मान - अभी बाक़ी है..
पता - 1022, दुर्गा कॉलिनी, गुना (म.प्र.) 473001
ईमेल - deepakjaindeep@gmail.com
मोबाइल - 9977882130