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नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

सुशील कुमार सरना की क्षणिकाएँ

सुशील कुमार सरना की क्षणिकाएँ

सौ बार मरता है
मरने से पहले
जन्मदाता,
वृद्धाश्रम में
अकेला!

कुरेदने से ही
नहीं होते
सूखे ज़ख़्म हरे
बल्कि ज़ख़्मों की
पपड़ी के नीचे दबे
दर्द के जलजले भी
हो जाते हैं
जवाँ!

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जाने किसकी जुदाई का
दंश
पाषाण को रुला गया,
झील की लहरों पर
आसमां का
तनहा चाँद
घबरा गया!

**********


सौ बार मरता है
मरने से पहले
जन्मदाता,
वृद्धाश्रम में
अकेला!

**********


चीरता रहा
एक लम्हा
उल्फ़त का,
मेरी ख़ामोशी
तेरी याद बनकर!

**********


समझा दिया
मतलब मुहब्बत का
एक आँसू ने,
गिर कर
हथेली पर
अचानक!

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रचनाकार परिचय

सुशील कुमार सरना

ईमेल : sarnasushil@yahoo.com

निवास : जयपुर (राजस्थान)

निवास- 4/62, मालवीय नगर, जयपुर (राजस्थान)- 302017
मोबाइल- 9269296121