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छंद की पाठशाला- मनोज शुक्ल 'मनुज'

छंद की पाठशाला- मनोज शुक्ल 'मनुज'

इससे पूर्व के अंकों में आपने सवैया के मत्त गयंद, मोद, अरसात, किरीट, चकोर, मदिरा, सुमुखि, मुक्ताहरा, मंजरी, लवंगलता, सनेही, दुर्मिल, मनुज, सुंदरी ,सुखी, अरविन्द, हरीश व गंगोदक सवैया आदि का विधान पढ़ा। इस अंक में उड़ान सवैया, गुरुकुल सवैया, मंदारमाला सवैया, गोकर्ण सवैया, सर्वगामी सवैया व रेशमा सवैया का विधान उदाहरण सहित दिया जा रहा है।

इससे पूर्व के अंकों में आपने सवैया के मत्त गयंद, मोद, अरसात, किरीट, चकोर, मदिरा, सुमुखि, मुक्ताहरा, मंजरी, लवंगलता, सनेही, दुर्मिल, मनुज, सुंदरी ,सुखी, अरविन्द, हरीश व गंगोदक सवैया आदि का विधान पढ़ा। इस अंक में उड़ान सवैया, गुरुकुल सवैया, मंदारमाला सवैया, गोकर्ण सवैया, सर्वगामी सवैया व रेशमा सवैया का विधान उदाहरण सहित दिया जा रहा है।

(19) उड़ान सवैया

विधान-

7 रगण +1 भगण + लघु गणक
कुल- 24 वर्ण
(12-14 वर्ण पर यति)
212 212 212 212 212 212 212 211 12

हो गया फाग ही जो मिला आप से, बुद्धि ही हो गया जो बनी आप मन सी।
धूप मैं जो हुआ आप छाया बनीं, मैं हुआ बादलों  सा  हुईं  आप  घन  सी।
छन्द मैं जो बना आप हैं शिल्प सी, मैं बना भाव हूँ अर्थ हो, हो  छुअन सी।
आह! हूँ हो खुशी हार हूँ जीत  हो, ताप हूँ ठंड  हो  झूमती हो  पवन  सी।

                                                        -मनोज शुक्ल "मनुज"


(20) गुरुकुल सवैया
212*8+1
यति- 12 व 13 वर्णों पर यति
कुल- 25 वर्ण
212 212 212 212 212 212 212 212 1

भक्ति की शक्ति ले कर्म को मान दो,जीत लोगे सभी युद्ध भी हे!कुलीन।
जो डरे काम से जो टले राम से, धर्म से भी  गिरे  पुण्य  से  वो  विहीन।
शेष जो भी बचे मृत्यु के बाद  में, आप ये मान लो  सोच  से  है  नवीन।
सत्य को थाम लो मोक्ष का धाम लो, ईश भी है सदा सत्य  के ही अधीन।

                                                       -मनोज शुक्ल"मनुज"

(21) मंदारमाला सवैया
( तगण X 7 + गुरु )
कुल वर्ण - 22
12-10 वर्णों पर यति

221 221 221 221 221 221 221 2

रोको नहीं जो भरे प्रीति के भाव, ये भी हमारी कहानी  कहें।
रोको नहीं जो बढें प्रीति की राह, ये तो सदा मुक्ति गामी रहें।
जो भी कहा चित्त ने आपसे वो न, टालें बिना ही विचारे  गहें।
सोंचें करें कर्म अच्छे  हमेशा  न, बाँटें  बुराई  न  धोखे  सहें।

                                           -मनोज शुक्ल"मनुज"
(22)गोकर्ण सवैया
221*7+11
7तगण+11
कुल वर्ण - 23

221 221 221 221 221 221 221 11
माता हमारी सुनो ज्ञान रोता नहीं पूछ है  राह  होती  अगम।
जो हैं बड़े दुष्ट पापी अड़ंगा लगाते  हमेशा  हुई  आँख  नम।
कोई गुणी भूल से भी नहीं मान सम्मान पाता घिरा  घोर तम।
है आपसे आस हो नाश बेलाग कूटो न  कोई  बहाना  वहम।

                                           -मनोज शुक्ल"मनुज


( 23) सर्वगामी सवैया
( तगण X 7 + गुरु गुरु )
221*7+22
कुल वर्ण- 23

221 221 221 221 221 221 221 22 वे
झूठे नहीं ही बनो आप सच्चे बढ़ो बुद्धि वाले  सभी  द्वार  खोलो।
आडम्बरों से  बचो  कर्मयोगी  बनो  स्नेह  के बन्द  उद्गार घोलो।
जो है बही भक्ति की धार डूबो नहाओ उसी में बहो पाप धो लो।
श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री  राम  बोलो।

                                             -मनोज शुक्ल "मनुज"

(24) रेशमा सवैया
221*8+2
8तगण+2
वर्ण-25
यति--14-11

221 221 221 221 221 221 221 221 2

माँ ईश के तुल्य होती सदा धैर्य धारे, नहीं  दोष  कोई  सदा ही सही।
माँ नेह की छाँव है दुःख में साथ होती , गुणों से  सजाती हमेशा रही।
माँ पालती ढालती सद्गुणों को झुको जो,जहाँ स्वर्ग है ज्ञान गंगा  बही।
पीड़ा सहे जन्म की शक्ति अंबा लगे जो, हरे कष्ट ये दिव्य त्यागी मही।

                                                   -मनोज शुक्ल "मनुज"

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रचनाकार परिचय

मनोज शुक्ल 'मनुज'

ईमेल : gola_manuj@yahoo.in

निवास : लखनऊ (उत्तरप्रदेश)

जन्मतिथि- 04 अगस्त, 1971
जन्मस्थान- लखीमपुर-खीरी
शिक्षा- एम० कॉम०, बी०एड
सम्प्रति- लोक सेवक
प्रकाशित कृतियाँ- मैंने जीवन पृष्ठ टटोले, मन शिवाला हो गया (गीत संग्रह)
संपादन- सिसृक्षा (ओ०बी०ओ० समूह की वार्षिकी) व शब्द मञ्जरी(काव्य संकलन)
सम्मान- राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा गया प्रसाद शुक्ल 'सनेही' पुरस्कार
नगर पालिका परिषद गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत सम्मान
भारत-भूषण स्मृति सारस्वत सम्मान
अंतर्ज्योति सेवा संस्थान द्वारा वाणी पुत्र सम्मान
राष्ट्रकवि वंशीधर शुक्ल स्मारक एवं साहित्यिक प्रकाशन समिति, मन्योरा-खीरी द्वारा राजकवि रामभरोसे लाल पंकज सम्मान
संस्कार भारती गोला गोकरन नाथ द्वारा साहित्य सम्मान
श्री राघव परिवार गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत साधना के लिए सम्मान
आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा सम्मान
काव्या समूह द्वारा शारदेय रत्न सम्मान
उजास, कानपुर द्वारा सम्मान
यू०पी०एग्री०डिपा०मिनि० एसोसिएशन द्वारा साहित्य सेवा सम्मान व अन्य सम्मान
उड़ान साहित्यिक समूह द्वारा साहित्य रत्न सम्मान
प्रसारण- आकाशवाणी व दूरदर्शन से काव्य पाठ, कवि सम्मेलनों व अन्य साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता
निवास- जानकीपुरम विस्तार, लखनऊ (उ०प्र०)
मोबाइल- 6387863251