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फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

आत्मीयता के समंदर गोविंद गुलशन जी- कृष्ण कुमार नाज़

आत्मीयता के समंदर गोविंद गुलशन जी- कृष्ण कुमार नाज़

धुएँ  में  हैं  उजाले  की   लकीरें
दिया शायद अचानक बुझ गया है
मगर उसकी रोशनी अब भी हमारी यादों में जल रही है।


जाना है ‘नाज़’ सबको बहरहाल एक दिन
ऐसी  जगह  जहाँ  से  कोई  वापसी नहीं

वास्तविकता तो यही है कि आदरणीय गोविंद गुलशन जी किसी ऐसी दुनिया के बाशिंदे हो गये हैं, जहाँ से कोई कभी वापस नहीं आ पाता। लेकिन दिल है कि इस तथ्य को स्वीकार करने में स्वयं को असमर्थ महसूस कर रहा है। दिल कह रहा है कि गोविंद जी कहीं नहीं गये हैं, वह अब भी यहीं हैं, यहीं कहीं हैं हमारे बीच; अपनी ग़ज़लों के माध्यम से, अपनी आत्मीयता के माध्यम से, अपने मृदुल व्यवहार के माध्यम से।

संबंधों की अनगिनत पन्नों वाली पुस्तक में कुछ ही पन्ने ऐसे होते हैं, जिन्हें आप पढ़ते-पढ़ते मोड़ देते हैं, ताकि उन पर लिखी इबारत को बार-बार पढ़ सकें, बार-बार सराह सकें, भावनात्मक उद्वेग के साथ बार-बार उस इबारत के समक्ष नतमस्तक हो सकें। इस पुस्तक की महत्त्वपूर्ण इबारत के अक्षर-अक्षर में भाई गोविंद गुलशन जी की सुगंध यह कहते हुए प्रस्फुटित हो रही है कि मैं कृष्णबिहारी 'नूर' रूपी पुष्प की बहुत-सी पंखुडि़यों में से एक ऐसी पंखुड़ी हूँ, जो सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे नाम है।

यक़ीनन कृष्णबिहारी 'नूर' मात्र किसी पुष्प का नाम नहीं, बल्कि शायरी की तहज़ीब के उस महकते हुए उद्यान का नाम है, जिसमें रंग-बिरंगे फूल अपनी खिलखिलाहट के साथ अनुपम छटा बिखरते हैं। गोविंद गुलशन जी उन सौभाग्यशालियों में हैं, जिन्होंने पूज्य 'नूर' साहब के चरणों में अपनी अगाध श्रद्धा के साथ स्थान भी प्राप्त किया और सिद्ध भी कर दिया कि भगवान सदैव भक्त के वश में होते हैं।

'नूर' साहब जब-जब भी दिल्ली या ग़ाजि़याबाद आते थे, तो गोविंद जी के घर पर ही ठहरते थे। कई अवसरों का मैं भी गवाह हूँ कि आदरणीया भाभी जी ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार 'नूर' साहब के स्वागत में नतमस्तक होकर उनकी आवभगत में लीन हो जाता था। कुछ अवसरों पर ऐसा भी हुआ कि 'नूर' साहब के साथ-साथ मैं और भाई दीपक जैन साहब भी वहाँ उपस्थित होते थे और गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करते थे।

गोविंद गुलशन जी की शायरी समर्पण की शायरी है, जिसमें शिकवा-शिकायत की कोई गुंजाइश ही नहीं है। उनके यहाँ शृंगार तो भरपूर है, लेकिन मांसलता से कोसों दूर। ऐसा शृंगार, जो शरीर की नहीं, आत्मा की पहरेदारी करता है। मैं देखता हूँ कि आमतौर पर शायर अदब की शायरी और मुशायरे की शायरी को अलग-अलग ख़ानों में रखते हैं, लेकिन गोविंद जी अदब और मुशायरे की शायरी में कोई अंतर महसूस नहीं करते थे।

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दिया शायद अचानक बुझ गया है

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रचनाकार परिचय

कृष्ण कुमार 'नाज़ '

ईमेल : kknaaz1@gmail.com

निवास : मोरदाबद (उत्तर प्रदेश)

नाम- डॉ० कृष्णकुमार ‘नाज़’
जन्मतिथि-  10 जनवरी, 1961
जन्मस्थान- ग्राम कूरी रवाना, ज़िला मुरादाबाद (उ.प्र.)
शिक्षा- एम.ए. (समाजशास्त्र, उर्दू व हिंदी), बी.एड., पी-एच.डी. (हिंदी)
संप्रति-  शासकीय सेवा से निवृत्त
प्रकाशित कृतियाँ-
1. इक्कीसवीं सदी के लिए (ग़ज़ल-संग्रह),1998
2. गुनगुनी धूप (ग़ज़ल-संग्रह), 2002 व 2010
3. मन की सतह पर (गीत-संग्रह), 2003
4. जीवन के परिदृश्य (नाटक-संग्रह), 2010
5. उगा है फिर नया सूरज (ग़ज़ल-संग्रह), 2013
6. हिन्दी ग़ज़ल और कृष्णबिहारी ‘नूर’, 2014
7. व्याकरण ग़ज़ल का (2016 व 2018)
8. नई हवाएँ (ग़ज़ल-संग्रह), 2018
9. साथ तुम्हारे (गीत-संग्रह), 2022
10. दिये से दिया जलाते हुए (ग़ज़ल-संग्रह), 2023 
11. प्रश्न शब्दों के नगर में (साक्षात्कार-संग्रह), 2023
12. क़ाफ़िया (नए दृष्टिकोण के साथ तुकांत का प्रयोग) 2023
संपादन-
1. दोहों की चैपाल (2010), वाणी प्रकाशन
2. रंग-रंग के फूल (2019), किताबगंज प्रकाशन
3. नवगीत-मंथन (2019), किताबगंज प्रकाशन
4. बालगीत-मंथन (2019), किताबगंज प्रकाशन
5. दर्द अभी सोये हैं : डा. अजय अनुपम के गीत (2022)
प्रसारण-
दूरदर्शन और रेडियो स्टेशन से समय समय पर प्रसारण।
विशेष-
1. विभिन्न गायकों द्वारा गीत व ग़ज़लें स्वरबद्ध।
2. बरेली की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘निर्झरिणी’ द्वारा 'वरिष्ठ ग़ज़लकार डा. कृष्णकुमार नाज़ पर केन्द्रित अंक-12’ का प्रकाशन, जनवरी 2018, संपादक हरिशंकर सक्सेना।
3.  शाहजहांपुर के युवाकवि पीयूष शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक 'डा. कृष्णकुमार नाज़ की काव्य-चेतना' का वर्ष 2024 में प्रकाशन।
सम्मान- शताधिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
पुरस्कार- राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उ.प्र. लखनऊ द्वारा 51000/- की सम्मान-राशि सहित डा. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ पुरस्कार, वर्ष 2013-14 से पुरस्कृत।
संपर्क- 9/3, लक्ष्मीविहार, हिमगिरि कालोनी, काँठ रोड, मुरादाबाद-244105 (उ.प्र).
मोबाइल-  9273-76877, 98083-15744