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शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के माहिए

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के माहिए

धन एक छलावा है।
बात पते की है,
सब एक दिखावा है।।


जब प्यार करेंगे हम।
भूल जहाँ को फिर,
हर दर्द सहेंगे हम।।


औकात दिखाई है।
शत्रु तभी माना,
जब धूल चटाई है।।


मन दीप जलाओ तुम।
प्रीति जगाके फिर,
तम दूर भगाओ तुम।।


वो रात कहाँ अबतो?
प्यार भरी जग में,
सौगात कहाँ अबतो?


तुम पाप नहीं करना।
कष्ट मिले तो फिर,
संताप नहीं करना।।


विश्वास दिया हमको।
जाल बिछा के फिर,
यूँ फाँस लिया हमको।।


क्यों नैन सदा बहते?
पास नहीं अपने,
हम दर्द सदा सहते।।


प्रिय! मौत नहीं देना।
प्रीत जताके फिर,
प्रिय! सौत नहीं देना।।


धन एक छलावा है।
बात पते की है,
सब एक दिखावा है।।


हिय प्रेम दया रखता।
ताव नहीं खाता,
घर द्वार तभी सजता।।


क्यों चाह रखें हम तो
छोड़ चले जाना
क्यों? डाह रखें हमतो।


झंकार लिखूँ मैं तो।
बात जरा हट के,
शृंगार लिखूं मैं तो।।

 

क्यों?आस रखी मैंने?
संग चलोगे तुम,
मन प्यास रखी मैंने।।


तन गौण हुआ मेरा।
प्रीति समाई जब,
मन मौन हुआ मेरा।।


जब रूठ गए अपने।
टूट गया दिल भी,
सब लूट गए सपने।।

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रचनाकार परिचय

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

ईमेल : shakuntalaagrwal3@gmail.com

निवास : भीलवाड़ा (राज०)

जन्मतिथि- 17 मार्च, 1963
शिक्षा- स्नातकोत्तर
लेखन विधाएँ- लघुकथा, कहानी, एकांकी व छांदसिक रचनाएँ
प्रकाशन- 'दर्द की परछाइयाँ', 'बाकी रहे निशान', 'काँच के रिश्ते', 'शकुन सतसई' (दोहा संग्रह), 'भावों की उर्मियाँ' (कुंडलियाँ संग्रह),'लघुकथा कौमुदी' (लघुकथा संग्रह), 'यादों के तटबंध' (गीत संग्रह)
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित।
सम्मान- जिला साहित्यकार परिषद, भीलवाड़ा द्वारा 'साहित्य सुधाकर- 2018'
विक्रमाशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा 'विद्यावाचस्पति सम्मान- 2018'
द्वारकेश साहित्य परिषद, कांकरोली द्वारा सम्मानित- 2019
संपर्क- हनुमत कृपा, 10- बी-12, आर० सी० व्यास कॉलोनी, केशव हॉस्पिटल के पास, भीलवाड़ा (राज०)- 311001
मोबाइल- 9462654500