Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

मानसिक स्वास्थ्य: एक टैबू- डॉ० दीप्ति तिवारी 

मानसिक स्वास्थ्य: एक टैबू- डॉ० दीप्ति तिवारी 

आजकल की दौड़ भाग भरी जिंदगी में लोगों के सामने काफी नए और अनोखे मसले आने लगे हैं युवा अपने काम और घर के मध्य थक हार रहे हैं। घरों से दूर बड़े शहरों में सारा दिन काम करके उनमें घर संभालने की हिम्मत कहाँ ही रह जाएगी। छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई के बोझ के तले दबे रहते हैं। 

आजकल की दौड़ भाग भरी जिंदगी में लोगों के सामने काफी नए और अनोखे मसले आने लगे हैं युवा अपने काम और घर के मध्य थक हार रहे हैं। घरों से दूर बड़े शहरों में सारा दिन काम करके उनमें घर संभालने की हिम्मत कहाँ ही रह जाएगी। छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई के बोझ के तले दबे रहते हैं, विद्यालय से आकर होमवर्क और ट्यूशन में अपना समय देना और उस सब के बाद थोड़ा सा कुछ वक़्त अपने बचपन को देना जिसमें बड़ी मुश्किल से तो वह बाहर जाते हैं वरना तो वीडियो गेम्स या यूट्यूब खोलकर स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं। रही बात बुजुर्गों की ज़्यादातर बुज़ुर्गों के बच्चे बाहर नौकरी करते हैं जिनके बच्चे उनके साथ भी हैं वह भी इस भागती-दौड़ती दुनिया में अपने घर वालों के लिए मुश्किल से ही समय निकाल पाते हैं।  ऐसी दुनिया में जहाँ सब एक दूसरे के साथ तो रहते हैं मगर क़रीब नहीं है जहाँ ज़िन्दगी जीने के लिए जन्म लेते ही रेस के घोड़े की तरह भागने लगते हैं। ऐसी दुनिया में खुशियाँ प्रेम शांति और स्थिरता की कमी होना और दुख गुस्सा संतुष्टता में बढ़ोतरी होना स्वाभाविक है, यही कारण है कि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य ख़राब रहने की इतनी घटनाएँ बढ़ती जा रही है ना तो हम अपने लिए वक़्त निकाल पाते हैं ना दूसरों के लिए, मनुष्यों का स्वभाव आंतरिक रूप से सामाजिक है, अपने स्वभाव के प्रतिकूल हम जब अपना अधिकांश समय अपने ख़यालों में या अकेले बिताते हैं तो बेचैनी होनी ही है। हम शायद शारीरिक स्वास्थ्य में दिक्कत आने पर उसकी अच्छे से देखभाल कर लेते हैं क्योंकि वह हमारी नज़र के सामने हैं मानसिक स्वास्थ्य दिखता नहीं है सिर्फ़ महसूस किया जाता है। वह अमूर्त है इसको नज़रअंदाज़ करना या टाल देना आसान ह।  अपनी रोज़ की भाग दौड़ में दो पल थम कर खुद को समझना दिल खोल के अपने प्रिय जनों से बात करना, ख़ुद को अनुमति देना कि दुख हो रहा है तो दुखी हो लें कुछ तनाव है तो शांति से समय लगाकर समाधान कर लें दिल भरा है तो खुलकर भड़ास निकाल लें शायद यही समाधान है। ज़िन्दगी में हमें इतना उलझना नहीं चाहिए कि हम ज़िन्दगी जीना ही भूल जाएँ। अपने लिए और अपने पारिवारिक मित्रों के लिए हमेशा समय निकालें जैसे किसी शारीरिक परेशानी के लिए हम किसी डॉक्टर के को दिखाते हैं मानसिक परेशानी में भी किसी भी पेशेवर को दिखाया जा सकता है इससे हम पागल या सनकी नहीं बल्कि समझदार साबित होते हैं। ठीक वैसे ही जैसे आप ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर चलते हुए लड़खड़ा जाने पर हम दूसरेराही का हाथ पकड़ने से अपाहिज नहीं कहलाए जाते। अपने मानसिक तनाव से जूझने में किसी का सहारा लेने में आप विक्षिप्त नहीं बन जाएँगे क्योंकि हमारे समाज ऐसे विचारों का प्रचलन बहुत है। बहुत लोग मदद लेने से हिचकिचाते हैं, ऐसा करके वह सिर्फ ख़ुद को तक़लीफ़ देते हैं जीवन को शांत और सरल बनाएँ, जिन चीजों से प्रसन्नता मिलती है वह करें, मदद लेने से हिचकिचायें नहीं और अपनी भावनाओं का सम्मान करें। 
 
******************

0 Total Review

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

दीप्ति तिवारी

ईमेल : deptitew@gmail.com

निवास : कानपुर(उत्तर प्रदेश)

नाम- डॉ० दीप्ति तिवारी 
जन्मतिथि- 30 सितंबर 1972 
जन्मस्थान- कानपुर (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा- एम बी बी एस, एम ए (मनोविज्ञान),डिप्लोमा ( मेंटल हेल्थ), पी जी  डिप्लोमा(काउंसलिंग एंड बिहैवियर मैनेजमेंट), पी जी डिप्लोमा(चाइल्ड साइकोलजी), पी जी डिप्लोमा(लर्निंग डिसबिलिटी मैनेजमेंट)
संप्रति- फैमिली फिजीशियन एंड काउन्सलर, डायरेक्टर, संकल्प स्पेशल स्कूल, मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट, जी टी बी हॉस्पिटल प्रा. लि. 
प्रकाशन- learning Disability: An Overview 
संपर्क- फ्लैट न. 101 , कीर्ति समृद्धि अपार्टमेंट, 120/806, लाजपत नगर, कानपुर(उत्तर प्रदेश)
मोबाईल- 9956079347