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डॉ० प्रदीप अवस्थी के बालगीत

डॉ० प्रदीप अवस्थी के बालगीत

पौधा माँ के नाम लगायें
धरती माँ को हरा बनायें

जीवन का माँ पोषण करती
बच्चों के कष्टों को हरती

आँगन की क्यारी

तुमको पाकर मन हर्षाया
तुमने बगिया को महकाया

मन्द-मन्द मुस्काते हो तुम
दिल में उतरे जाते हो तुम

मनमोहन सा रूप सलोना
हुआ प्रकाशित कुल का कोना

द्वारे दीप जलाओ घी का
सिद्ध मनोरथ सबके जी का

पूरी हो गयी सबकी आस
हुआ अटल प्रभु! पर विश्वास

पग-पग पर तुम अव्वल आना
माँ-बापू का मान बढ़ाना

फूल खिलें यश की फुलवारी
तुम महको आँगन की क्यारी

ईश कृपा से शुभ दिन आया
घर-द्वारे उजियारा छाया

सूचित हो यह शुभ संवाद
मिले सभी का आशीर्वाद

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झूला 

पेड़ों में पड़ता है झूला
कजरी गाती देखो फूला

सावन वर्षा झूमे डाली
गुड़िया झूल रही मतवाली

आगे पीछे पेंग बढ़ाएँ
फुनगी को छू करके आएँ

नीम आम पर डाले जाते
त्यौहारों की याद दिलाते

सखियाँ मिलकर गाना गातीं
सारी बिटियाँ मइके आतीं

मेंहदी लगा रचायें हाथ
मेला चलेंगे सब मिल साथ

खूब जलेबी खायेंगे हम
रहट झूलकर आयेंगे हम

थककर जब भी घर आयेंगे
पके आम मिलकर खायेंगे

मन की शक्ति बढ़ाता झूला
आपस में मिलवाता झूला

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मेरा ध्रुव तारा

प्रतिदिन तुम बढ़ते जाओ,
कीर्तिमान गढ़ते जाओ।

मिले सभी का प्यार तुम्हें,
खुशियों का संसार तुम्हें।

सीढ़ी-सीढ़ी चढ़ते जाओ,
हरदम नयी सफलता पाओ।

दुखियों की सेवा तुम करना,
उनके कष्टों को तुम हरना।

मात पिता का रखना ध्यान,
देना उनको हरदम मान।

ईश्वर तुमको ऐसा वर दें,
खुशियों से झोली को भर दें।

इत्र सरीखे हरदम गमको,
ध्रुव तारा बनकर तुम चमको।

बनो विवेकानंद समान,
दुनिया में होगी पहचान।

बुद्धि विवेक का हो भंडार,
प्रेम करे तुमको संसार।

हम सबका गौरव बन जाना,
देश से भ्रष्टाचार मिटाना।

बेटा करना नहीं विवाद,
शिक्षा देता, आशीर्वाद। 

मेरी आँखों का तुम नूर,
सुख समृद्धि रहे भरपूर।

चिरंजीव हो लाल हमारा,
रहे सदा हम सबका प्यारा।

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खेल

खेल सभी को भाता है जी
स्वस्थ शरीर बनाता है जी

जीवन में लाता उल्लास
अजब गजब इसका इतिहास

रविवार को खेलने जाते
मित्रों के संग मौज उड़ाते

गिल्ली डंडा, कंचा खेला
खेल खेल मे हुआ झमेला

खेला खो-खो और कबड्डी
ताकतवर बन जाती हड्डी

बैडमिंटन हो या फुटबाल
करते रहते खूब धमाल

बैट बॉल में नाम कमाते
विश्व विजेता बन कर आते

मुक्केबाजी, तीरंदाजी
सबमें हमने मारी बाजी

उठ्ठक बैठक, दंड लगाओ
खेल-खेल में देह बनाओ

सारे जग में नाम कमाया
भारत का परचम लहराया

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एक पौधा माँ के नाम

पौधा माँ के नाम लगायें
धरती माँ को हरा बनायें

जीवन का माँ पोषण करती
बच्चों के कष्टों को हरती

बच्चों पर ममता बरसाती
बदले में वो क्या है पाती?

आओ भू को खूब सजाएं
पीपल बरगद नीम लगाएं

मौसम को खुशनुमा बनाएं
हरियाली चूनर पहनाएँ

आओ मिलकर पेड़ लगाएं
हरा - भरा संसार बनाएँ

वृक्ष लगाओ, धरा बचाओ
प्राण वायु निर्माण कराओ

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रचनाकार परिचय

प्रदीप अवस्थी

ईमेल : awasthipradeep2005@gmail.com

निवास : कानपुर (उत्तर प्रदेश)

नाम- डॉ० प्रदीप अवस्थी
जन्मतिथि- 20.051976
जन्मस्थान- कानपुर
शिक्षा- बी.एससी., एम.ए. (हिन्दी, दर्शनशास्त्र)एम.बी.ए., बी.एड., विशिष्ट बी.टी.सी., पीएच.डी. (हिन्दी)
संप्रति- अध्यापन
प्रकाशन- राम खण्ड अवधी महाकाव्य में धर्म और साधना का स्वरुप -2018
प्यारे बच्चों न्यारे बच्चों -2020
खेल खिलौने वाली आयी -2022
सम्मान /पुरस्कार- विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर द्वारा... विद्यासागर सारस्वत सम्मान -2019
प्राथमिक शिक्षा सुधार परिकल्पन, कानपुर,द्वारा..डॉ.राधाकृष्णन सम्मान -2019
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सेवी संस्थान, प्रयागराज द्वारा -साहित्य वाचस्पति सम्मान 2020
भारत दर्शन वाटिका, पठानकोट, पंजाब द्वारा.. साहित्य मार्तण्ड सम्मान -2020
साहित्य मण्डल श्रीनाथद्वारा... बाल साहित्य भूषण मानद उपाधि-2025
सम्पर्क- 107/4ए जवाहर नगर, कानपुर -208012
मोबाइल- 9451515747