Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

छन्द कि पाठशाला- मनोज कुमार शुक्ल 'मनुज'

छन्द कि पाठशाला- मनोज कुमार शुक्ल 'मनुज'

इससे पूर्व के अंकों में आपने सवैया के मत्त गयंद, मोद, अरसात, किरीट,चकोर, मदिरा, सुमुखि, मुक्ताहरा, मंजरी, लवंगलता, सनेही व दुर्मिल आदि भेदों के विधान के बारे में पढ़ा। इस अंक में मनुज सवैया, सुंदरी सवैया, सुखी सवैया, अरविन्द सवैया, हरीश सवैया व गंगोदक सवैया का विधान उदाहरण सहित दिया जा रहा है।

इससे पूर्व के अंकों में आपने सवैया के मत्त गयंद, मोद, अरसात, किरीट,चकोर, मदिरा, सुमुखि, मुक्ताहरा, मंजरी, लवंगलता, सनेही व दुर्मिल आदि भेदों के विधान के बारे में पढ़ा। इस अंक में मनुज सवैया, सुंदरी सवैया, सुखी सवैया, अरविन्द सवैया, हरीश सवैया व गंगोदक सवैया का विधान उदाहरण सहित दिया जा रहा है।

13- मनुज सवैया

सात सगण+एक भगण
कुल वर्ण- 24
यति- 12-12 वर्ण पर

उदाहरण 
112 112 112 112 112 112 112 211
अपना-अपना कहते-कहते,  सबके  घड़ियाल  बजाते  वह।
जगती पर वो न सुखी जन हो, जग में कुछ नाम कमाते वह।
सबको  खुश  हैं  करते  रहते, सबके  तलवे  सहलाते  वह।
जग चारण हैं सुख दास बने, कवि  होकर  श्वान  कहाते वह।
मनोज शुक्ल 'मनुज'

14- सुंदरी सवैया

आठ सगण+गुरु
कुल वर्ण- 24

उदाहरण
112 112 112 112 112 112 112 112 2

तपती धरती तपता पवमान तपे  जन  जीवन  मेह  बिना  रे।
अटके खटके लटके भव  में  भटके यह जीवन गेह  बिना रे।
पियको हियमें भरलो तबभी डसती कसती निशि  देहबिना रे।
धन हो तन हो मन हो न दुखी दहता नित जीवन नेह बिना रे।
मनोज शुक्ल 'मनुज'

15- सुखी सवैया

विधान:- आठ सगण + लघु लघु
112*8+11
कुल वर्ण- 26
(यति - 12,14 पर)

उदाहरण
धन की यदि चाह लिखावट से तब आप लिखो कुछ गद्य  सुहावन।

लिख दो कथनी करनी गढ़ दो कुछ कोष तुकांत अमोल  सुपावन।
यदि ये न करो लिख दो कुछ भी तुम चीख पढ़ो बरसो बिन सावन।
समझो पकड़ोकविता  सविता  चमको  जग  में  बनके  मनभावन।
मनोज शुक्ल 'मनुज'

16- अरविंद सवैया

112*8+1
विधान:- आठ सगण + लघु
112*8+1
कुल वर्ण - 25

उदाहरण
मन में दुविधा जितनी उतना  तगड़ा  करना  पड़ता  उपचार।
कर लो कुछ काम सुनाम मिले हर बात नहीं गहती प्रतिकार।
तज दो प्रतिकार पिता गुरु का मिलता सब है यह जीवन सार।
यदि मैं तुमको सच में  अमरत्व  प्रदान  करूँ समझो उपहार।
मनोज शुक्ल 'मनुज'

17- हरीश सवैया

212*7+211+1
7 रगण+भगण+लघु
यति-12,13
कुल-25 वर्ण

उदाहरण
देश के प्रेम में जो मिली देह को,देह की प्राण की यातना को नमन ।

लोक कल्याण के ही लिए जो हुई,आपकी मानसी कामना को नमन।
दीन के कष्ट को जो हरे दीन से,देव  की अर्चना  याचना  को  नमन।
जो सभी के लिए सोचता नेक हो,नेक की नेक सी भावना को नमन ।
मनोज शुक्ल 'मनुज'

18- गंगोदक सवैया

8 रगण
यति-12,12
कुल-24 वर्ण

उदाहरण
बीज से पौध है पौध से पेड़ है,पेड़ से  बीज  है ये  सभी  जानते।
जानते मृत्यु के भेद को तो सभी,हैं कहाँ मृत्यु के मर्म को मानते।
मानते जो वही जीत के योग्य हैं ,ज्ञान के कोष को जानते छानते।
छानते दोष हैं जो सदा ढूँढ के,वो सभी पा रहे  जो  जहाँ  ठानते।
मनोज शुक्ल 'मनुज'

******************

0 Total Review

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

मनोज शुक्ल 'मनुज'

ईमेल : gola_manuj@yahoo.in

निवास : लखनऊ (उत्तरप्रदेश)

जन्मतिथि- 04 अगस्त, 1971
जन्मस्थान- लखीमपुर-खीरी
शिक्षा- एम० कॉम०, बी०एड
सम्प्रति- लोक सेवक
प्रकाशित कृतियाँ- मैंने जीवन पृष्ठ टटोले, मन शिवाला हो गया (गीत संग्रह)
संपादन- सिसृक्षा (ओ०बी०ओ० समूह की वार्षिकी) व शब्द मञ्जरी(काव्य संकलन)
सम्मान- राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा गया प्रसाद शुक्ल 'सनेही' पुरस्कार
नगर पालिका परिषद गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत सम्मान
भारत-भूषण स्मृति सारस्वत सम्मान
अंतर्ज्योति सेवा संस्थान द्वारा वाणी पुत्र सम्मान
राष्ट्रकवि वंशीधर शुक्ल स्मारक एवं साहित्यिक प्रकाशन समिति, मन्योरा-खीरी द्वारा राजकवि रामभरोसे लाल पंकज सम्मान
संस्कार भारती गोला गोकरन नाथ द्वारा साहित्य सम्मान
श्री राघव परिवार गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत साधना के लिए सम्मान
आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा सम्मान
काव्या समूह द्वारा शारदेय रत्न सम्मान
उजास, कानपुर द्वारा सम्मान
यू०पी०एग्री०डिपा०मिनि० एसोसिएशन द्वारा साहित्य सेवा सम्मान व अन्य सम्मान
उड़ान साहित्यिक समूह द्वारा साहित्य रत्न सम्मान
प्रसारण- आकाशवाणी व दूरदर्शन से काव्य पाठ, कवि सम्मेलनों व अन्य साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता
निवास- जानकीपुरम विस्तार, लखनऊ (उ०प्र०)
मोबाइल- 6387863251