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अंजू केशव की ग़ज़लें

अंजू केशव की ग़ज़लें

हर जख़्म मेरा वक़्त ने भर तो दिया लेकिन
तकलीफ़ जो दिल की है वही कम नहीं होती

ग़ज़ल- एक
बेशक तुम आपबीती अँधेरों से पूछना
पर दर्द उनका सिर्फ़ चराग़ों से पूछना

पी कर भी ज़ह्र बाँटती सबको ये ज़िंदगी
क़िस्सा नवाज़िशों का हवाओं से पूछना

अपनी जगह पे मग्न रहें साथ भी रहें
है पाएदारी क्या ये दिशाओं से पूछना

बस स्वाद का पता मिला सबको ज़ुबान से
तासीर पर नमक का तो घावों से पूछना

चाहे तो पूछना न बिगड़ने की बात पर
बिगड़ी बनी तो क्यों ये दुआओं से पूछना

बेशक है पत्थरों में वज़्न पर न साँस है
जीने का क्या मज़ा है बहावों से पूछना

देगी न क्यों ये ज़िंदगी ख़ुशियों का हर पता
बस इत्मिनान और अदाओं से पूछना

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ग़ज़ल- 2 

आज दौलत आपके जो हाथ आई है
सोचिए कि इसमें कितनों की कमाई है

एक दिन फिर आज गुज़रा हँस के जब मेरा
ज़िंदगी से ये कहा तुझको बधाई है

जब परिंदा पास आया तब समझ पाया
है तो ये बरगद मगर ये बोनसाई है

सिर्फ़ कहने को न है कि 'हँस सलामत रह'
सच में ये तरकीब मेरी आज़माई है

हर ख़ुशी पाबंद है माना उजालों के
पर जनम लेता अँधेरे में कन्हाई है

है ख़िलाफ़ इक दूसरे के जिस्म का हर अंग
ख़्वाब आँखें देखतीं मुँह में जम्हाई है

बादलो! बरसो कि तन की हो सियाही कम
लूट लेती चैन ये काली कमाई है


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ग़ज़ल- तीन 

ज़िंदगी भर वो बदहवास रहे
अपनी ख़्वाहिश का जो भी दास रहे

फ़र्क समझे ग़लत सही का न वो
दिल में जिसके कि बस भड़ास रहे

कर्म अच्छे भले फलें न फलें
अपना हरदम मगर प्रयास रहे

हैं ज़ुदा दोनों गर्व और ग़ुरूर
पर रहे जब भी दोनों पास रहे

ख़ून में आएगी ख़ुशी कैसे
आपकी रग़ ही जब उदास रहे


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ग़ज़ल- चार 
कुल-दीप से पापा की परी कम नहीं होती
लड़की कोई लड़कों से कभी कम नहीं होती

मरने के हैं दिख जाते जहाँ लाख बहाने
जीने को वहाँ एक ख़ुशी कम नहीं होती

हो दर्द से ही अश्क़ों का रिश्ता न ज़रूरी
ख़ुशियों में भी आँखों की नमी कम नहीं होती

हर जख़्म मेरा वक़्त ने भर तो दिया लेकिन
तकलीफ़ जो दिल की है वही कम नहीं होती

पछतावे से पोछा तो कभी अश्क़ों से धोया
पर गर्द गुनाहों की जमी कम नहीं होती

किस-किस की फ़जीहत न हुई इश्क़ में फिर भी
इसकी कभी जादूगरी ही कम नहीं होती

तौहीन न हो दीप की सूरज की गली में
ये रौशनी ज़्यादा न सही कम नहीं होती

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रचनाकार परिचय

अंजू केशव

ईमेल : keshawanju@gmail.com

निवास : जमशेदपुर (झारखंड)

जन्मतिथि- 24 अप्रैल
जन्मस्थान- पटना (बिहार)
शिक्षा- स्नातकोत्तर (हिंदी)
सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन
लेखन विधाएँ- ग़ज़ल, कविता, कहानी, लघुकथा आदि
प्रकाशन- 'सन्नाटे में शोर बहुत है' (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं एवं साँझा संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित।
सम्मान/पुरस्कार- सृजन साहित्य सम्मान, मैथिली शरण गुप्त सम्मान
पता- 40, पी०एस०, रो नं०- 3, संकोशाई, डिमना रोड, जमशेदपुर (झारखंड)- 831012
मोबाइल- 8210046398